कोरोना के बीच मनाए जा रहे देवी-देवताओं के महाकुंभ अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के छठे दिन बुधवार को मौहल्ला मनाया गया। मौहल्ला के मौके पर दशहरा में शामिल हुए 282 देवी-देवताओं ने भगवान रघुनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई। अस्थायी शिविर में पहुंचकर देवताओं ने भगवान रघुनाथ को लंका पर चढ़ाई से पहले शक्तियां प्रदान कीं। सभी देवता राजा की चानणी के पास भी गए।
लोगों को देवी-देवताओं का भव्य देव मिलन देखने को मिला। ढोल-नगाड़ों और नरसिंगों की स्वरलहरियों से पूरा ढालपुर मैदान गूंज उठा। कई देवता पांच दिन बाद अपने अस्थायी शिविरों से निकले और लाव लश्कर के साथ रघुनाथ के दरबार में पहुंचे। दशहरा में देव मिलन का यह नजारा आकर्षण का केंद्र रहा।
कई लोगों ने इस सुंदर नजारे को अपने कैमरों में कैद किया। सुबह 11 बजे के बाद भगवान रघुनाथ के दरबार में देवताओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। दोपहर दो बजे के यहां देवताओं की भीड़ लग गई। रघुनाथ के दरबार मे पहुंचने के बाद भगवान रघुनाथ के मुख्य कारकूनों की ओर से शिविर में पहुंचे सभी देवी-देवताओं को रघुनाथ की ओर से पगड़ी दी गई।
मौहल्ला में अधिष्ठाता देवता बिजली महादेव, राजपरिवार की दादी कही जाने वाली माता हिडिंबा, सृष्टि नारायण, देवता शृंगा ऋषि, देवता बालू नाग, माता दोचा मोचा, माता शरवरी, माता कोटली, रैला के लक्ष्मी नारायण, मनु ऋषि, ब्यास ऋषि, टकरासी नाग, कोट पझारी सहित भगवान रघुनाथ के दरबार में आए।
देवमिलन की रस्म को पूरा करने के बाद देवता अपने अस्थायी शिविर में वापस आए। उधर, जिला देवी-देवता कारदार संघ के महासचिव नारायण चौहान ने कहा कि दशहरे में मौहल्ला का दिन देवमिलन का भव्य नजारा देखने को मिला है। मौहल्ला के दिन हल्ला होता है। इसलिए इसे स्थानीय भाषा में मौहल्ला कहा जाता है।