देवधुन में ढोल, नगाड़ा, नरसिंघे, करनाल, शहनाई और शंख का इस्तेमाल किया गया। शहनाई वादकों ने देवधुन में पारंपरिक पहाड़ी गीत पेश किए। आयोजन के लिए बंजतरी सुबह नौ बजे से ही रथ मैदान में एकत्रित हो गए थे।
जारी किया प्रमाण-पत्र
कार्यक्रम के लिए कुल्लू पहुंचे इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड से दो अधिकारी आए हुए थे। देवधुन खत्म होते ही एक अधिकारी ने मुख्यमंत्री को इंडिया बुक ऑफ रिकॉड्र्स का एक पदक और प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।