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कुल्लू दशहरा: 2200 बंजतरियों ने एक साथ बजाई देवधुन, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज

Sun, 13 Oct 2019 06:57 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुल्लू
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- फोटो : अमर उजाला
कुल्लवी नाटी के विश्व रिकार्ड के बाद अब ढालपुर के रथमैदान में आयोजित देवधुन इंडिया बुक ऑफ  रिकॉर्ड में शामिल हो गई है। रविवार को रथमैदान में दशहरा में आए सैकड़ों देवी देवताओं के 2200 बजंतरियों ने एक साथ विश्व शांति के लिए देवधुन बजाई। दशहरा में आयोजन को हुए 359 वर्षों में यह पहला अवसर था जब दशहरा में आए सभी देवी देवताओं के बजंतरी एक साथ रथमैदान में एकत्रित हुए।
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यह वाद्ययंत्र गूंजे

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इस भव्य व अलौलिक दृश्य के साक्षी जहां प्रदेश के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर बने वहीं देश-विदेश के पर्यटकों के साथ हजारों लोगों ने इस अनुपम नजारे को देखा। रविवार दोपहर बाद 12:30 बजे जैसे ही मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर खुली जीप में रथ मैदान पहुंचे तो उनका स्वागत ढोल-नगाड़ों के साथ हुआ। उनके रथ मैदान पहुंचते ही मंत्रोच्चारण और शंखध्वनि के साथ एक साल 2200 बजंतरियों ने देवधुन का शुभारंभ किया। करीब 40 मिनट तक हुए इस आयोजन से ऐसा लग रहा था मानो ढालपुर स्वर्गलोक में तब्दील हो गया है।
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इस मौके पर सीएम ने लोगों से हिमाचल और जिला कुल्लू की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सामान्य रूप से राज्य के लोगों और विशेष रूप से कुल्लू जिले के लोगों के लिए एक बड़ा सम्मान है कि देवधुन इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में शामिल किया गया है। जय राम ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि यह आयोजन न केवल एक नियमित कार्यक्रम बन जाए बल्कि अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा का एक अतिरिक्त आकर्षण भी बने। इस दौरान उन्होंने देवधुन के लिए अपनी ओर से पांच लाख रुपये देने की घोषणा की।

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- फोटो : अमर उजाला
देवधुन में ढोल, नगाड़ा, नरसिंघे, करनाल, शहनाई और शंख का इस्तेमाल किया गया। शहनाई वादकों ने देवधुन में पारंपरिक पहाड़ी गीत पेश किए। आयोजन के लिए बंजतरी सुबह नौ बजे से ही रथ मैदान में एकत्रित हो गए थे। 

जारी किया प्रमाण-पत्र
कार्यक्रम के लिए कुल्लू पहुंचे इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड से दो अधिकारी आए हुए थे। देवधुन खत्म होते ही एक अधिकारी ने मुख्यमंत्री को इंडिया बुक ऑफ  रिकॉड्र्स का एक पदक और प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।
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देवी-देवताओं के महाकुंभ अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का सोमवार को लंका दहन के साथ समापन होगा। लंका दहन की चढ़ाई में अधिष्ठाता रघुनाथ समेत कई देवी-देवता शिरकत करेंगे। दशहरा उत्सव के छठे दिन मोहल्ला के अवसर पर सैकड़ों देवता अपने अस्थायी शिविरों से बाहर निकले और भगवान रघुनाथ के अस्थायी शिविर पहुंचे।
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देवताओं ने रघुनाथ से देव मिलन किया। इस दौरान देव परंपरा के अनुसार ढालपुर में सजी राजा की चानणी में जाकर देवताओं ने लंका दहन की चढ़ाई से पूर्व भगवान रघुनाथ को शक्तियां प्रदान की। इससे पूर्व नरसिंह भगवान की अंतिम जलेब निकाली गई।
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