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भव्य रथ यात्रा के साथ कुल्लू दशहरा शुरू, 225 देवता शिविरों में हुए विराजमान

Sat, 20 Oct 2018 10:22 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुल्लू
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देव-मानस मिलन के साथ अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा महोत्सव का शुभारंभ हुआ। राज परिवार की दादी कही जाने वाली मां हिडिंबा, बिजली महादेव के आगमन और माता भेखली का इशारा मिलते ही शुक्रवार शाम 4.30 बजे घाटी के अधिष्ठाता भगवान रघुनाथ की भव्य रथयात्रा शुरू हुई।
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रथ मैदान से लेकर ढालपुर तक हजारों लोग और देसी-विदेशी सैलानी इस महोत्सव के साक्षी बने। 60 से अधिक देवी-देवताओं की उपस्थिति में सैकड़ों ढोल-नगाड़ों, नरसिंगों, शहनाई की स्वरलहरियों के साथ जय श्रीराम के उद्घोष के बीच सभी धर्मों के लोगों ने एक साथ भगवान रघुनाथ का रथ खींचकर पुण्य कमाया।
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रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह और राज परिवार परिवार के अन्य सदस्यों ने रथ की अगवानी की। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने भी रथयात्रा में शिरकत की। इसके बाद महोत्सव में शिरकत करने आए घाटी के करीब 225 देवी-देवता अपने देवलुओं के साथ अस्थायी शिविरों में विराजमान हो गए।

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पिछले साल के मुकाबले इस बार ज्यादा भीड़ रही। तिल धरने की जगह नहीं थी। पूरा शहर जाम रहा। सात दिन तक देव कारज चलेंगे और लोग देवताओं का आशीर्वाद लेंगे। 25 अक्तूबर को सभी देवी-देवता अपने मूल स्थान की ओर लौट जाएंगे।
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भगवान रघुनाथ की दायीं ओर चलने के धुर विवाद को लेकर बंजार घाटी के देवता शृंगा ऋषि और बालूनाग पुलिस पहरे में रहे। दोनों देवता रथयात्रा में शामिल नहीं हुए। पिछले कुछ वर्षों से दोनों देवता विवाद के चलते रथयात्रा में शामिल नहीं हो रहे हैं। दोनों देवता बिना निमंत्रण दशहरा उत्सव में पहुंचे हैं।
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कुल्लू दशहरा में शिरकत करने वाले देवी-देवता अरबों के सोने-चादी से सुसज्जित हैं। कई देवताओं के मोहरे और गहने अष्टधातू के हैं जो बेशकीमती हैं। जिला पुलिस-प्रशासन की ओर से देवताओं की सुरक्षा के लिए 24 घंटे पुलिस तैनात की गई है। अस्थायी शिविरों में रात को भी पुलिस के जवान तैनात रहेंगे।
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एक सप्ताह तक चलने वाले अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा महोत्सव का आगाज शुक्रवार को पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ हुआ। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने ढालपुर मैदान में भगवान रघुनाथ की रथयात्रा में भाग लेकर दशहरा महोत्सव का शुभारंभ किया।

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लेडी गवर्नर दर्शना देवी भी उपस्थित रहीं। राज्यपाल ने दशहरा के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई दी। कहा कि यह उत्सव बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

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प्रदेश की संस्कृति बहुत समृद्ध और अद्वितीय है। इसकी विश्व में अलग पहचान है। प्रदेश में वर्ष भर होने वाले मेले और त्योहार यहां के लोगों की समृद्ध परंपराओं और धार्मिक आस्था को दर्शाते हैं।

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आधुनिकता के इस दौर में भी प्रदेश के लोगों ने अपनी समृद्ध संस्कृति और रीति-रिवाजों को संरक्षित रखा है। उन्होंने कहा कि इन परंपराओं और संस्कृति को भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखने की आवश्यकता है।

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राज्यपाल ने विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्ड, निगमों और गैर-सरकारी संगठनों की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया और स्टालों पर जाकर विभिन्न उत्पादों का अवलोकन किया।

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कुल्लू दशहरा उत्सव में इस वर्ष क्षेत्र के लगभग 225 देवी-देवता शामिल हुए हैं। इससे पहले, आचार्य देवव्रत का भुंतर हवाई अड्डे पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। परिवहन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर और अन्य भी मौजूद रहे।

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रथ मैदान में शामिल होने पहुंचे श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में ज्यादा रही। भगवान रघुनाथ की रथयात्रा को देखने के लिए लोगों ने कई घंटे पहले आकर स्थान आरक्षित किया। कई घंटों एक स्थान में ही हजारों श्रद्धालु डटे रहे और अद्भुत नजारे को अपने कैमरों में कैद किया।
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देवता धूमल नाग ने रथ मैदान में भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस की भूमिका अदा की। देवता धूमल नाग ने देव परंपराओं का निर्वहन करने के लिए तय स्थान से आगे आए लोगों को हटाया और देव कारज के लिए जगह बनाई। देवता को आता देख श्रद्धालु भी शीश नवाकर पीछे हट गए।
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