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अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन: धर्मगुरु दलाईलामा बोले- जल न बचाया तो बंजर बन जाएगा खूबसूरत नीला ग्रह

Sun, 24 Apr 2022 01:23 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला

सार

 मैक्लोडगंज में चल रहे तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा ने कहा कि जल ही हमारे जीवन का आधार है। आने वाले वर्षों में पानी के बड़े स्रोत नदियों का संरक्षण करना हमारी बड़ी जिम्मेवारी है। 
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तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के मैक्लोडगंज में चल रहे तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा ने कहा कि जल ही हमारे जीवन का आधार है। आने वाले वर्षों में पानी के बड़े स्रोत नदियों का संरक्षण करना हमारी बड़ी जिम्मेवारी है। अपने जीवनकाल में मैंने तिब्बत में बर्फबारी और नदियों में पानी की मात्रा को घटते देखा है। बीते समय में हमने पानी के मूल्य को नहीं समझा है। हमने पानी के स्रोतों के बारे में ज्यादा ध्यान दिए बगैर इसका बेरोकटोक इस्तेमाल किया है। अब हमें पेयजल स्रोतों का संरक्षण करने के लिए और अधिक सावधान होने की जरूरत है। 

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उन्होंने कहा कि हमारे कंधों पर यह बड़ी जिम्मेवारी है कि आने वाली पीढ़ियों को भी पीने के लिए साफ पानी मिल सके। अगर हमने इसके लिए प्रयास नहीं किए तो दुनिया के मरुस्थल में बदलने का खतरा पैदा हो जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो यह खूबसूरत नीला ग्रह बंजर हो जाएगा। बिना पानी के यह एक सफेद चट्टान बनकर रह जाएगा। सुंदरलाल बहुगुणा सहित मेरे बहुत से भारतीय मित्र अकसर कहते हैं कि इस संकट से बचने के लिए लोगों को अधिक से अधिक पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करने के लिए कहा था।  सम्मेलन में कनाडा से आई तिब्बती व्यवसायी महिला सेरिंग यांगकी के सवाल के जवाब में दलाईलामा ने कहा कि शारीरिक सुखों को बढ़ाने के लिए तकनीक एक कारगर उपाय है, मगर सबसे महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में हमें अपने दिमाग को प्रशिक्षित करना है।

उन्होंने कहा कि भौतिक विकास जरूरी है और सहायक भी, लेकिन इसे हासिल करने की एक निश्चित सीमा होनी चाहिए। अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए दिमाग पर कार्य करना ज्यादा प्रभावशाली तरीका है। बुद्ध ने दूसरों की सेवा के लिए छह वर्षों तक उपवास का पालन किया। तिब्बती योगी मिलारेपा और हाल के वर्षों को याद करूं तो महात्मा गांधी ने बिलकुल सादा जीवन जिया, लेकिन दोनों ने मानसिक स्तर पर गहरी संतुष्टि हासिल की। बता दें कि जलवायु परिवर्तन को लेकर मैक्लोडगंज में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘डायलॉग फॉर अवर फ्यूचर: अ कॉल टू क्लाइमेट एक्शन’ का आयोजन किया जा रहा है। दुनिया के विभिन्न हिस्सों से पर्यावरण कार्यकर्ता और वैज्ञानिक सम्मेलन में भाग लेने के लिए पहुंचे हैं।

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