कांगड़ा जिले की संस्थाओं को चीन से आ रहे फंड पर केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की पैनी नजर है। सूचना मिलते ही ये एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। ये विदेशी मदद का रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। चीन के निशाने पर चल रहे तिब्बती धार्मिक नेता दलाईलामा की सुरक्षा के मद्देनजर यह सतर्कता बढ़ी है। चीन से आर्थिक मदद आने के इस मामले को अमर उजाला ने भी प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
कांगड़ा जिले की दो बौद्ध संस्थाओं को शैक्षणिक गतिविधियों के नाम पर चीन के अलग-अलग क्षेत्रों से आर्थिक मदद आ रही है। एक संस्था तो पिछले तीन महीनों यानी अप्रैल, मई और जून में चीन के कई शहरों-कस्बों और अन्य स्थानों से मदद आई है। हालांकि, इन संस्थाओं ने चीन से मिले फंड की जानकारी केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसे पब्लिक डोमेन में डाला है।
इसके बाद ही खुफिया एजेंसियां गृह मंत्रालयों को इन संस्थाओं की ओर से दिए गए फंड का बारीकी से अध्ययन कर रही है कि चीन से यह किन-किन लोगों की ओर से जारी किया गया। इसे कहां खर्च किया जा रहा है। जिन बौद्ध संस्थाओं को यह मदद मिली है, उनका कांगड़ा जिले में अपना स्वतंत्र अस्तित्व है।
यानी वे तिब्बत की निर्वासित सरकार या दलाईलामा के पूर्ण नियंत्रण में नहीं हैं। इनमें से एक संस्था को तो पिछले लंबे अरसे से चीन से शैक्षणिक गतिविधियों के नाम पर फंड मिल रहा है। हालांकि, यह फंड लाखों रुपये में है, जबकि यही संस्था कई अन्य देशों से करोड़ों रुपये की मदद प्राप्त कर रही है।