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Shimla News: बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के चल रहे वाहन का बीमा क्लेम खारिज

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जिला उपभोक्ता आयोग शिमला का फैसला
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बीमा कंपनी को प्रीमियम राशि वापस करने के दिया आदेश
रुचि सांख्यान
शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई ट्रांसपोर्ट वाहन बिना वैध फिटनेस सर्टिफिकेट के चलाया जाता है और दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है तो बीमा कंपनी क्लेम को खारिज करने के लिए पूरी तरह से अधिकृत है।

आयोग ने इस आधार पर एक शिकायतकर्ता के क्लेम को खारिज कर दिया लेकिन बीमा कंपनी को ली गई प्रीमियम राशि लौटाने का निर्देश दिया है। आयोग ने शिकायतकर्ता की मुख्य क्लेम राशि की मांग को खारिज कर दिया है लेकिन यह भी माना कि बीमा कंपनी ने बिना फिटनेस सर्टिफिकेट जांचे ही प्रीमियम की राशि 14,540 रुपये स्वीकार की थी। इसे देखते हुए आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ता को 14,540 रुपये की राशि 45 दिनों के भीतर वापस करे। चौपाल तहसील के दरवार गांव निवासी राय सिंह ने उपभोक्ता आयोग में श्री राम जनरल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी।
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शिकायतकर्ता का वाहन 26 अगस्त 2018 को दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। राय सिंह का तर्क था कि दुर्घटना के समय वाहन का बीमा प्रभावी था इसलिए उन्हें बीमा राशि मिलनी चाहिए। दूसरी ओर बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि यह वाहन एक ट्रांसपोर्ट वाहन (लाइट गुड्स व्हीकल) था और दुर्घटना के समय उसका फिटनेस सर्टिफिकेट 8 सितंबर 2013 को ही समाप्त हो चुका था। कंपनी ने कहा कि बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के वाहन का चलना मोटर व्हीकल एक्ट और बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है जिसके कारण क्लेम को 24 अक्तूबर 2018 को खारिज कर दिया था। आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 39 और 56 के तहत बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के ट्रांसपोर्ट वाहन को वैध रूप से पंजीकृत नहीं माना जा सकता। आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय और राज्य उपभोक्ता आयोग के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए माना कि यह बीमा पॉलिसी की शर्तों का मौलिक उल्लंघन है।
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