हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग हमीरपुर की ओर से यह भी अवगत कराया गया है कि राज्य के कुछ सरकारी कॉलेजों में बनाए गए कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) केंद्रों में आवश्यक मानकों के अनुरूप सुविधाओं का अभाव पाया गया है। इसमें हार्डवेयर की खराब स्थिति, नेटवर्क की समस्या, सिस्टम की धीमी गति और अन्य तकनीकी खामियां शामिल हैं। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने सभी संबंधित प्राचार्यों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने संस्थानों में चिन्हित कमियों को युद्धस्तर पर दूर करें और सीबीटी केंद्रों की पूरी तरह से तैयारियों को सुनिश्चित करें। भविष्य में आयोजित होने वाली परीक्षाओं के दौरान किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा न आए, इसके लिए सभी केंद्रों को पूरी तरह से सक्षम बनाया जाए। यदि किसी भी संस्थान में इन निर्देशों की अवहेलना पाई जाती है या सुधार कार्य में अनावश्यक देरी होती है, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों के अलग काडर पर प्राथमिक शिक्षक संघ को एतराज
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ हिमाचल प्रदेश ने राज्य में नए खोले जा रहे सीबीएसई स्कूलों के लिए शिक्षकों का अलग काडर बनाए जाने के प्रस्ताव पर कड़ा एतराज जताया है। संघ का कहना है कि इस तरह का फैसला न केवल वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों की योग्यता पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि एक ही राज्य में सरकारी स्कूलों के बीच अनावश्यक भेदभाव भी पैदा करता है। संघ की ओर से जारी बयान में अध्यक्ष रमेश शर्मा ने स्पष्ट किया कि सीबीएसई स्कूलों में पहले से सेवाएं दे रहे शिक्षक पूरी तरह प्रशिक्षित, योग्य और निर्धारित चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही नियुक्त किए गए हैं। ऐसे में अलग से शिक्षक काडर बनाने का औचित्य समझ से परे है। प्राथमिक शिक्षक संघ का कहना है कि हिमाचल प्रदेश जैसे छोटे राज्य में अपने ही सरकारी स्कूलों के लिए अलग-अलग शिक्षक काडर बनाना तर्कसंगत नहीं है। इससे न केवल प्रशासनिक जटिलताएं बढ़ेंगी, बल्कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों का मनोबल भी टूटेगा। संघ ने मांग की है कि सीबीएसई स्कूलों में नर्सरी से पांचवीं कक्षा तक का समस्त शैक्षणिक व प्रशासनिक नियंत्रण पहले की तरह केंद्रीय मुख्य शिक्षकों के अधीन ही रखा जाए। साथ ही, इन स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए कोई अलग प्रक्रिया न अपनाई जाए, बल्कि मौजूदा सरकारी भर्ती व्यवस्था से ही नियुक्तियां की जाएं। उन्होंने कहा कि सीबीएसई स्कूलों और हिमाचल प्रदेश स्कूली शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों के बीच इस तरह का विभाजन अन्यायपूर्ण है। इससे एक ही सरकारी तंत्र में पढ़ने वाले बच्चों और पढ़ाने वाले शिक्षकों के बीच असमानता पैदा होगी। संघ ने सरकार से आग्रह किया है कि यदि सीबीएसई स्कूलों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं दी जा रही हैं, तो वही सुविधाएं अन्य सरकारी स्कूलों में भी उपलब्ध करवाई जाएं। साथ ही, प्रदेश भर में शिक्षकों के हजारों खाली पदों को जल्द भरा जाए।