अब सत्ता में आने के छह माह बाद भाजपा सरकार ने जांच करवाने का फैसला लिया है। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में तीन बैंकों राज्य सहकारी बैंक, कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक और जोगिंद्रा केंद्रीय सहकारी बैंक में विभिन्न पदों पर भर्तियां की गईं थीं।
इनमें नियमों को ताक पर रखकर अपनों को नियुक्ति देने के आरोप लगे हैं। विधानसभा चुनाव से साल भर पहले पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में भाजपा ने राज्यपाल को चार्जशीट सौंप जांच की मांग की। आरोप था कि भर्तियों में भाई-भतीजावाद हावी रहा।
हिमाचल सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह बीके अग्रवाल ने कहा कि विजिलेंस ब्यूरो को बैंकों में अनियमितताओं की जांच दे दी गई है। सरकार ने इस संबंध में जांच का फैसला लिया है।
हिमाचल प्रदेश सहकारी बैंक के पूर्व चेयरमैन हर्ष महाजन ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सहकारी बैंक में सभी भर्तियां पारदर्शी तरीके से हुई हैं। प्रदेश सरकार चाहे तो विजिलेंस को छोड़ वह देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी से भी छानबीन करवा सकती है। जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।