अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि केंद्रीय कार्मिक विभाग को भेजी फाइल में तर्क दिया कि चूंकि इस मामले में केंद्र से आए फंड पर भी भारी अनियमितताओं का अंदेशा है, इसलिए जांच सीबीआई से करवाना जरूरी है।
फर्जी एडमिशन से हड़पी छात्रवृत्ति राशि
जांच रिपोर्ट में कई निजी शिक्षण संस्थानों पर फर्जी एडमिशन दिखाकर सरकारी धनराशि हड़पने का आरोप है। साल 2013-14 से लेकर साल 2016-17 तक किसी भी स्तर पर छात्रवृत्ति योजनाओं की मॉनीटरिंग नहीं हुई।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक अस्सी फीसदी छात्रवृत्ति का बजट सिर्फ निजी संस्थानों में बंटा, सरकारी संस्थानों को छात्रवृत्ति बजट की मात्र 20 फीसदी राशि ही मिली। निजी संस्थानों को 210 करोड़ और सरकारी संस्थानों को 56 करोड़ की राशि दी गई।
जांच रिपोर्ट के अनुसार 19,915 विद्यार्थियों को एक ही मोबाइल नंबर वाले बैंक खाते में छात्रवृत्ति राशि जारी हुई। 360 छात्रों का बैंक खाता नंबर भी एक समान है। 5729 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने में आधार नंबर का प्रयोग ही नहीं हुआ।
जिला लाहौल-स्पीति में पांच साल तक अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति राशि नहीं मिलने का मामला ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से उठाया। इस मामले के उठने के बाद कृषि मंत्री रामलाल मारकंडा ने भी शिक्षा
सचिव के समक्ष कुछ स्थानीय छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिलने की बात बताई। खबर प्रकाशित होने के बाद हरकत में आए शिक्षा महकमे ने जांच के दौरान कई खामियां पाईं। जिसके चलते सरकार को सीबीआई जांच की सिफारिश करनी पड़ी।