एसपी गांधी ने कहा कि नशा तस्करी के आरोपी संजय भूरिया के मामले में डीजीपी कार्यालय के स्टाफ की संलिप्तता सामने आने पर दो महीने पहले ही सत्र न्यायालय से केस की आगामी जांच करने के लिए मंजूरी मांगी है। उन्होंने कहा कि नशा तस्करी बड़ी समस्या है। शिमला में पदभार संभालते ही नशा तस्करों के खिलाफ उन्होंने कड़ी कार्रवाई करना शुरू की थी। लेकिन जब डीजीपी के कार्यालय में ही ऐसे लोग हों, तो पुलिस अधीक्षक के नाते न्याय प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए जनता को सचेत करना जरूरी है। महत्वपूर्ण जांच को भी इस तरह के लोगों से बचाना भी एसपी का धर्म है।
गांधी ने आरोप लगाया कि गोपनीय सूचनाएं लीक होने के मामले में सीआईडी की शिकायत पर जिला पुलिस ने छोटा शिमला थाने में इस बारे में केस दर्ज किया था। इसमें सीआईडी की एक मामले में जांच के बाद गोपनीय चिट्ठी को ऑफिस से निकालकर लीक करवाया गया था। शिमला पुलिस की जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं कि डीजीपी का निजी स्टाफ इसमें संलिप्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान डीजीपी ने जांच को बाधित करने के प्रयास भी किए। यही नहीं, ऐसी कई शिकायतें जिला शिमला पुलिस को प्राप्त हुई हैं, जिनमें डीजीपी के आचरण को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं, जिनका खुलासा समय आने पर किया जाएगा।
शिकायतें मिलने पर फिर खोली विनय अग्रवाल मामले की जांच
विनय अग्रवाल पर कथित रूप से उद्योगपतियों से फर्जी आईजी बनकर उगाही करने के आरोप लगे थे। इस मामले में सीआईडी ने एफआईआर दर्ज की थी। एसपी ने बताया कि इस मामले में डीजीपी की ओर से दायर हलफनामे के बाद हाईकोर्ट ने एफआईआर को खारिज कर दिया था। कुछ दिन पहले शिकायतें प्राप्त हुईं कि डीजीपी ने अधिकारियों पर दबाव बनाकर हाईकोर्ट में हलफनामा दायर किया था। इसके चलते अब दोबारा से मामले की जांच शुरू की गई है। एसपी ने बताया कि इस बारे में उन्होंने एडवोकेट जरनल और अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह के कार्यालय को पत्र के माध्यम से सूचित किया है।
एसपी बोले, ना एक्सटेंशन चाहिए ना अन्य पद की लालसा, नौकरी छोड़ने को तैयार
- गांधी ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि उन्हें ना तो एक्सटेंशन चाहिए और ना ही किसी अन्य पद की कोई लालसा है। मैंने 26 साल की नौकरी पूरी निष्ठा और ईमानदारी से की है। कभी भी मुझ पर कोई आरोप नहीं लगा। मेरी छवि पर अगर इस तरह से सवाल उठाए जाएंगे तो मैं किसी दबाव में नहीं आऊंगा। मैं अपने सिद्धांतों से समझौता करने की जगह नौकरी छोड़ने को प्राथमिकता दूंगा।
संजय भूरिया केस अदालत में विचाराधीन : पीएचक्यू
एसपी के आरोपों पर पुलिस महानिदेशक डॉ. अतुल वर्मा ने सीधे मीडिया के सामने आकर तो स्थिति स्पष्ट नहीं की, मगर राज्य पुलिस मुख्यालय की ओर से स्पष्ट किया गया है कि चिट्टा तस्कर संजय भूरिया का मामला सत्र न्यायालय में विचाराधीन है। न्यायालय इस पर फैसला लेगा। उद्योगपतियों से फर्जी आईजी बनाकर उगाही करने वाला मामला हिमाचल उच्च न्यायालय 10 जनवरी 2025 को खारिज कर चुका है। इसी मामले की सीबीआई जांच की अपील को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर पंचकूला थाने को जांच के आदेश दिए हैं। सीआईडी से गोपनीय सूचनाएं लीक करने के मामले को जांच के लिए 22 फरवरी 2025 को स्टेट सीआईडी को भेज दिया गया है और इस मामले से संबंधित रिकार्ड सीआईडी को सौंपने के लिए 21 अप्रैल 2025 को एसपी शिमला को पत्र लिखा गया।
अचानक नई दिल्ली गए डीजीपी डॉ. अतुल वर्मा
राज्य पुलिस महानिदेशक डॉ. अतुल वर्मा शनिवार देर शाम शिमला से नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए। वह नई दिल्ली में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मुलाकात कर सकते हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार डीजीपी ने पुलिस अधीक्षक संजीव गांधी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए भी सरकार को संस्तुति की है। हालांकि, उनकी ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
विधायक सुधीर के खिलाफ एसपी ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका
एसपी शिमला ने प्रदेश उच्च न्यायालय में विमल नेगी से संबंधित सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल करने के मामले में विधायक सुधीर शर्मा के खिलाफ प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने जब मुझे एसआईटी की जांच रिपोर्ट के संबंध में अपना पक्ष रखने की अनुमति दी, उस समय विधायक सुधीर शर्मा ने प्रदेश उच्च न्यायालय के नियमों के विपरीत अपने स्वार्थ के लिए दुर्भावना से मेरी छवि को खराब करने के लिए नकारात्मक तरीके से पेश किया। उन्होंने कहा कि नियमों के तहत ऐसा नहीं किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले में विधायक सुधीर शर्मा को जांच में शामिल किया गया है और अभी तक की जांच में वह इस पूरे मामले के मास्टरमाइंड सामने आ रहे हैं। इस संबंध में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। इसमें कोर्ट से आग्रह किया है कि कंटेप्ट ऑफ प्रोसिडिंग के साथ कॉपीराइट और इन्फॉर्मेशन एक्ट में उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
विधायक सुधीर ने एसपी शिमला संजीव को भेजा लीगल नोटिस
भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने खुद पर लगाए आरोपों के सिलसिले में एसपी शिमला संजीव गांधी को लीगल नोटिस भेजा है। उन्होंने कहा कि न्याय के लिए एसपी हो या कोई अन्य अधिकारी, हर स्तर पर कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। सुधीर ने कहा कि जल्द ही एसपी शिमला के खिलाफ विधानसभा में विशेषाधिकार प्रस्ताव भी लाया जाएगा। जरूरी हुआ तो अदालत में आपराधिक मानहानि का मामला भी दायर किया जाएगा। भाजपा विधायक ने पुलिस अधीक्षक शिमला संजीव गांधी की ओर से प्रेस वार्ता में उनका नाम लेकर प्रदेश उच्च न्यायालय की लाइव कार्यवाही को सोशल मीडिया पर दिखाने और छवि खराब करने को लेकर उठाए सवाल पर पलटवार किया है। सुधीर ने शनिवार को जारी वीडियो में कहा कि उच्च न्यायालय खुद अपनी कार्यवाही को लाइव चलाकर लोगों को दिखाता है कि पारदर्शिता क्या है। सुधीर ने खुद वीडियो नहीं बनाया है।
विधायकों की खरीद-फरोख्त के एसपी के आरोपों पर ने कहा कि अगर एसपी शिमला के पास सबूत थे तो एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की। आज जब एसपी शिमला खुद दलदल में फंस गए हैं तो सुधीर शर्मा, प्रदेश के मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा पर आरोप लगा रहे हैं। क्या साधु केवल एसपी शिमला ही हैं, खुद को ईमानदारी के सर्टिफिकेट बांटना बंद करें। लोगों को याद रखना चाहिए कि हर गांधी महात्मा नहीं होता है। सीबीआई को यह भी जांचना चाहिए कि यह व्यक्ति किस-किस जिले में डीएसपी, एएसपी और एसपी रहा और वहां क्या-क्या घटित हुआ और इस व्यक्ति का जूनियर अधिकारियों के साथ कैसा व्यवहार रहा। सुधीर ने कहा कि संजीव जब एसपी कांगड़ा थे तो सरकार को जिले के दो एसपी जिला में बांटना पड़ा। निलंबित एएसआई पंकज कुमार को गृह मंत्रालय सुरक्षा उपलब्ध करवाएं। पंकज एसपी शिमला के अधीन है, वह पेन ड्राइव लेकर कैसे गायब हो गया। एसपी शिमला पत्रकार वार्ता कर तथ्यों को छुपाने का प्रयास कर रहे हैं।