प्रदेश में शिक्षा विभाग की खाली पड़ी भूमि पर उद्योग लगाए जाएंगे। नवंबर में प्रस्तावित धर्मशाला इन्वेस्टर मीट के लिए प्रदेश सरकार लैंड बैंक तैयार करने में जुट गई है। सूबे के सभी सरकारी स्कूल और कॉलेज प्रिंसिपलों सहित जिला उपनिदेशकों से बेकार पड़े भवनों और भूमि का ब्योरा मांगा गया है।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में इन्वेस्टर मीट की समीक्षा के लिए होने वाली बैठक में इस मामले को रखा जाएगा। जयराम सरकार ने प्रदेश में 85 हजार करोड़ के निवेश का लक्ष्य रखा है। इसके चलते उद्योगपतियों के लिए भूमि का इंतजाम करने के लिए शिक्षा विभाग से भविष्य में प्रयोग न की जाने वाली भूमि और भवनों का ब्योरा मांगा है।
धर्मशाला में पहली इन्वेस्टर मीट से पहले प्रदेश में उद्योगपतियों की जरूरत को देखते हुए पहला लैंड बैंक तैयार कर लिया गया है। सरकार ने तीन जिलों कांगड़ा, ऊना और सोलन में करीब 750 एकड़ का लैंड बैंक बनाया है। बड़े उद्योगपतियों की संभावित जमीन की जरूरतों के दृष्टिगत लैंड बैंक बनाया गया है।
इन्वेस्टर मीट से पहले देश-विदेश के बड़े औद्योगिक घराने अगर उद्योग स्थापित करने में रुचि दिखाते हैं तो उनके साथ लैंड बैंक की जानकारी साझा की जाएगी। पहला लैंड बैंक तैयार करने के बाद सरकार ने दूसरे लैंड बैंक के लिए 650 एकड़ भूमि का इंतजाम करना भी शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में शिक्षा विभाग से सरकार ने प्रयोग में नहीं लाई जा रही भूमि व भवनों की जानकारी मांगी है।