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फार्मा कंपनियों पर भी नियंत्रण करना चाहता था तिलकराज, दो मंत्री नहीं मानें

Mon, 05 Jun 2017 12:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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घूसखोरी के आरोप में फंसा निलंबित संयुक्त निदेशक तिलकराज शर्मा फार्मा कंपनियों पर भी उद्योग महकमे का नियंत्रण चाहता था। सूत्रों की मानें तो अपने इस अधिकारी की सलाह पर उद्योग विभाग राजी हो चुका था।
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ये मामला सरकार की मंजूरी को भी भेजा गया था, मगर इस मुद्दे पर दो मंत्रियों की ठन जाने के बाद राज्य सरकार को ये प्रस्ताव वापस लेना पड़ा था। तिलकराज शर्मा चाहता था कि स्वास्थ्य महकमे की ड्रग कंट्रोल अथॉरिटी भी उद्योग महकमे के तहत लाई जाए। 
दरअसल, हिमाचल प्रदेश में फार्मा कंपनियों और उद्योगों का एक बड़ा कारोबार है।

इनसे विदेशों के लिए भी दवाइयां जाती हैं। फार्मा उद्योगों की स्थापना को सब्सिडी जहां उद्योग महकमा देता है, वहीं कुछ वक्त पहले ये तय किया गया था कि क्यों न इन सभी फार्मा कंपनियों और उद्योगों को सीधे उद्योग महकमे के नियंत्रण में लाया जाए। 
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बताते हैं कि राज्य मंत्रिमंडल के सदस्यों के एकमत नहीं हो पाने के कारण प्रदेश सरकार को इस फैसले से पीछे हटना पड़ा था। इसके बाद भी फार्मा उद्योगों को उद्योग महकमे के तहत लाने के प्रयास जारी रहे, मगर इसमें कामयाबी नहीं मिली। 

बद्दी के कई उद्योगों का रिकार्ड खंगाल सकती है सीबीआई 
बहुचर्चित रिश्वत कांड के बाद निलंबित उद्योग विभाग के संयुक्त निदेशक तिलकराज शर्मा के खुलासों के आधार पर सीबीआई बद्दी की कई औद्योगिक इकाइयों में दबिश दे सकती है। इसके अलावा आरोपी की कॉल डिटेल और फोन टैपिंग से भी सीबीआई को महत्वपूर्ण जानकारी मिली है।

इधर, तिलकराज शर्मा रिश्वत कांड की गूंज प्रदेश सचिवालय से लेकर केंद्र तक जा पहुंची है। इस मामले में नित नए खुलासे होने लगे हैं। सीबीआई ने मामले से जुड़े तमाम पहलुओं को खंगालना शुरू कर दिया है।

बताया जा रहा है कि निलंबित संयुक्त निदेशक तिलकराज ने ऊना जिले में अपने डेढ़ वर्ष के कार्यकाल के दौरान अच्छे खासे सियासी रिश्ते बना लिए थे। सीबीआई इसी जानकारी के आधार पर बद्दी सहित ऊना में दबिश देने की तैयारी में है।

बताया जा रहा है कि जिन बड़े नामों का खुलासा इस प्रकरण में हुआ है, सीबीआई उनसे भी पूछताछ कर सकती है। इसके अलावा बद्दी में रिश्वत के तौर पर पैसा देने वाले उद्योगों के रिकॉर्ड को भी सीबीआई खंगाल सकती है।     
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