करीब 45 हजार छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयों वाले हिमाचल प्रदेश में उद्योग क्षेत्र में करीब 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश का सरकारी दावा है। हर साल प्रदेश सरकार भी बजट में उद्योगों और उद्योगपतियों के लिए कुछ न कुछ रखती है लेकिन धरातल के हालात इससे मेल नहीं खाते।
सरकारी घोषणाओं और दावों के उलट औद्योगिक गतिविधियां लगातार सिमटती नजर आती हैं। कारण यह है कि सरकार उद्योगों की समस्याएं तो सुनती है लेकिन नीतियां अपनी सुविधा के हिसाब से तैयार करती है। नतीजतन हिमाचल के उद्योग बीमार होते जा रहे हैं। इन बीमार उद्योगों को सहारा देने के लिए सरकार नीति लाती है लेकिन उसमें कथनी और करनी के अंतर से हालात जस के तस बने रहते हैं।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने पिछले एक दशक में हिमाचल में एक के बाद एक कई औद्योगिक क्षेत्र बनाए। कई तरह की योजनाएं व एलान किए लेकिन विशेष पैकेजों के प्रस्ताव पर भी नए उद्योग लगने का नाम नहीं ले रहे। दरअसल, औद्योगिक क्षेत्र में बिजली, पानी, सड़क जैसा मजबूत आधारभूत ढांचा नहीं जुटाया जा रहा जिससे उद्योगपति हिमाचल आने से कतराते हैं।
पिछली सरकारों ने हिमाचल में उद्योग लगाने के लिए कई महत्वपूर्ण एलान किए। ऑनलाइन आवेदन करने से लेकर सिंगल विंडो सिस्टम या उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए मकान बनाने के लिए धारा 118 में कुछ राहत देने जैसे वायदे किए गए। सरकार ने जो भी दावे किए, धरातल पर उसका असर नजर नहीं आया।
विदेशों तक बैठकें, नतीजे नकारात्मक
पिछली सरकारों ने दिल्ली से बंगलूरू, मुंबई, अहमदाबाद ही नहीं बल्कि रूस जैसे देशों में भी जाकर निवेशकों के साथ बैठकें कीं। हर बार बैठकों के बाद दावा किया गया कि हजारों करोड़ का निवेश होगा और बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार मिलेगा। लेकिन दावे से एक चौथाई निवेशक भी हिमाचल में निवेश नहीं कर पाए।
विशेष पॉलिसी का इंतजार कर रहे उद्योगपति
केंद्र के विशेष पैकेज खत्म होने के बाद प्रदेश के उद्योग जगत को राज्य सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले बजट में खासी उम्मीदें हैं। उद्योगपति राजेश साबू ने आशा जताई कि उद्योगों के लिए कोई विशेष पॉलिसी इस बजट में जरूर बनेगी। प्रदेश के लघु उद्योगों को भी आस है कि मध्यप्रदेश, राजस्थान की तर्ज पर सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लिए अलग से पॉलिसी की घोषणा होगी।
वहीं, उद्योगपति आईएमजेएस संधू ने कहा कि लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों के लिए केंद्र से जो अनुदान योजनाएं प्रायोजित की जा रही हैं, उन्हें प्रदेश में लागू किया जाए। प्रदेश में उद्योगों के लिए रेलवे लाइन और हवाई पट्टी के लिए भी प्रदेश सरकार बजट में प्रावधान करे। बेहतर कनेक्टिविटी से ही निवेशक राज्य का रुख करेंगे।
पूर्व सरकार ने उद्योगों को लेकर पांच वर्ष में क्या किया
पिछली सरकार ने उद्योग लगाने के लिए जमीन खरीदने पर धारा 118 को सरल करने का एलान किया। लेकिन आज भी निवेश करने से पहले उद्योगपतियों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। वहीं, सभी औद्योगिक क्षेत्रों को भौगोलिक सूचना प्रणाली जीआईएस के अंतर्गत लाने और निवेशक को घर बैठे स्थल निर्धारण की सुविधा देने की बात कही। इसके अलावा कई नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की बात कही गई लेकिन मूलभूत सुविधाएं ही नहीं मिल सकीं। नए उद्योग के लिए भूमि पर तीन फीसदी की दर से पंजीकरण की मांग भी है।
उद्योगों की उम्मीदें
- उद्योगों के लिए बिजली दरों को पंजाब और हरियाणा की तर्ज पर कम किया जाए
- कच्चे और तैयार माल की ढुलाई मेें लगने वाले खर्च पर सरकार सब्सिडी दे
- जीएसटी लागू होने के बाद राज्य के एसजीएसटी को प्रदेश सरकार रिफंड करे
- ट्रक ऑपरेटर यूनियनों को भंग किया जाए ताकि माल भाड़े पर मनमानी खत्म हो
- निवेशकों की सहूलियत के लिए सिंगल विंडो सिस्टम को और प्रभावी बनाएं
- माल को लाने-ले जाने के लिए सड़क या रेल यातायात को सुदृढ़ किया जाए
- नए उद्योग के लिए जमीन का रजिस्ट्रेशन कराने पर शुल्क माफ किया जाए
- नए उद्योग पर स्थानीय लोगों को तय संख्या में रोजगार देने की बाध्यता में शिथिलता बरतें