मनाली से लेह और हिंदुस्तान-तिब्बत बॉर्डर को जाने वाले मार्ग पर उद्योग विभाग ने अड़ंगा डाल दिया है। सड़क सीमा संगठन (बीआरओ) ने बॉर्डर रोड की मरम्मत और टारिंग के लिए तीन स्थानों पर क्रशर लगाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन विभाग की ओर से बीआरओ को ये स्वीकृतियां नहीं दी गई हैं।
बीआरओ ने औपचारिकताएं पूरी करके करीब डेढ़ साल पहले फाइल विभाग में जमा कराई है। मामला पेंडिंग होने से बॉर्डर तक जाने वाली सड़कों का काम धीमा हो गया है।
बीआरओ के मुताबिक मनाली से सरचू मार्ग के दारचा, हिंदुस्तान-तिब्बत जाने वाले मार्ग पर खाब और संधु में ये क्रशर लगाए जाने हैं। प्रदेश सरकार ने नदी-नालों से पत्थर, रोड़ी और रेत निकालने पर प्रतिबंध लगाया है।
ऐसे में सड़क सीमा संगठन को सड़क का काम करने में दिक्कतें पेश आ रही हैं। स्थिति यह है कि सप्ताह के काम महीने और डेढ़ महीने बाद पूरे हो रहे हैं। क्रशर की अनुमति मिलने से बीआरओ को रोड़ी, रेत और पत्थर निकालने में परेशानी नहीं होनी थी।
बीआरओ अफसरों का कहना है कि ये रोड देश की सुरक्षा और प्रदेश की अर्थ व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए बनाए जा रहे हैं। इन सड़कों में किसी भी तरह की आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
चीफ इंजीनियर बीआरओ ब्रिगेडियर एसके कटारिया ने बताया कि डेढ़ साल पहले क्रशर लगाने की अनुमति मांगी थी। जो भी औपचारिकताएं थीं वह पूरी की गई हैं।
लेकिन, अभी तक सड़क सीमा संगठन को विभाग की ओर से अनुमति नहीं मिली है। देश की सुरक्षा के लिए सड़कों को ठीक किया जाना है।
राज्य भू विज्ञानी उद्योग विभाग इंद्रेश धीमान का कहना है कि सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के पदाधिकारियों ने क्रशर लगाने के लिए आवेदन किया है, लेकिन बीआरओ ने क्रशर लगाने की औपचारिकताएं पूरी नहीं की हैं। इसके चलते मामला लटका हुआ है।