माता-पिता लड़कियों को लड़कों की तरह खेलने की आजादी दें, जिससे वह निडर होकर खेल सकें। ज्यादातर माता-पिता यही सोचते हैं कि अब हमारी बेटी ने पढ़ाई पूरी कर ली है और उसकी शादी करनी है। पढ़ाई के साथ अपने बच्चों को खेलने के लिए भी जागरूक करें। यह कहना है अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट खिलाड़ी सुषमा वर्मा का।
शिमला जिले से संबंध रखने वाली सुषमा ने दो दिन नादौन क्रिकेट स्टेडियम में अभ्यास किया। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सदस्य सुषमा ने कहा कि दादा जीत राम वर्मा को देख खेलने की लग्न पैदा हुई। कॉलेज में उन्हें पता चला कि कांगड़ा में एक गर्ल्स क्रिकेट अकादमी एचपीसीए द्वारा खोली जा रही है। अकादमी में चयन के बाद क्रिकेट की बारीकियों का पता चला।
उस समय अकादमी के कोच पवन सेन रहे। 2009 से लेकर अब तक सुषमा कुल 15 एक दिवसीय, एक टेस्ट मैच और बीस टी-ट्वंटी मैच खेल चुकी है। पहला इंटर स्टेट डेब्यू मैच नादौन क्रिकेट स्टेडियम में पंजाब की टीम से खेला। 2009 में सुषमा अंडर-19 हिमाचल महिला टीम की कप्तान रही। यह मैच हिमाचल ने जीता था। इसलिए नादौन क्रिकेट स्टेडियम को सुषमा अपने लिए लक्की मानती हैं। सुषमा ने अप्रैल 2013 में इंडिया टीम से पहला डेब्यू मैच बंगलादेश के खिलाफ खेला।
विश्व कप के लिए बहा रहीं पसीना
हाल ही में महिला भारतीय क्रिकेट टीम ने आईसीसी महिला विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया है। सुषमा ने कहा कि श्रीलंका में सुपर सिक्स मुकाबले में हमने पहले मैच में दक्षिणी अफ्रीका को हराकर आईसीसी महिला विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया। यह विश्व कप जून माह में होना है। इसके लिए वह रेगुलर अभ्यास कर रही हैं। सुषमा के पिता शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं, माता गृहिणी हैं। उनकी बड़ी बहन भी शिक्षा विभाग में कार्यरत है।
दादा से मिली खेलने की प्रेरणा
सुषमा ने कहा कि आज मैं जिस मुकाम पर पहुंची हूं, उसके लिए सबसे पहले अपने दादा और एचपीसीए अध्यक्ष अनुराग ठाकुर की आभारी हूं। बचपन से ही खेलने का बड़ा शौक था। दादा कबड्डी और फुटबाल के अच्छे खिलाड़ी थे। जिन्हें देख मेरे अंदर खेलने की लग्न पैदा हुई।