मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ने रेल महकमे से एचपीएमसी के उत्पाद को रेलवे में बेचने की मंजूरी को लेकर मामला उठाया था। सरकार का मानना था कि रेलवे जैसा बड़ा बाजार मिलने से प्रदेश में पैदा होने वाले फलों का अधिक से अधिक विधायन हो सकेगा।
10 हजार मीट्रिक टन होगी कोल्ड स्टोर क्षमता
हिमाचल में वर्तमान में 33 सौ मीट्रिक टन कोल्ड स्टोरेज क्षमता है। रेलवे की सप्लाई के लिए इसे 10 हजार मीट्रिक टन तक किया जाएगा। बागवानी विकास मिशन के तहत केंद्र सरकार से मंजूर हुए करीब 1100 करोड़ में से 900 करोड़ रुपये बागवानी को बढ़ावा देने और कोल्ड स्टोरेज क्षमता बढ़ाने पर खर्च होंगे।
एचपीएमसी के वर्तमान में दो बड़े फल विधायन केंद्र प्रदेश में मौजूद हैं। जिनमें से एक सुंदरनगर के जड़ोल में और दूसरा सोलन के परवाणू में है। दोनों ही विधायन केंद्रों के साथ छोटे-छोटे केंद्रों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर 202 करोड़ खर्च होंगे।
यह राशि बागवानी विकास मिशन के तहत मिले 11 सौ करोड़ में ही शामिल है। एचपीएमसी चेयरमैन राम सिंह ने इस बात करते हुए कहा कि भारतीय रेलवे के इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन से एचपीएमसी के टैट्रा पैक को बेचने की मंजूरी मिली है, जो कि प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि है।
इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया गया है। राम सिंह ने कहा कि कोल्ड स्टोरेज की क्षमता बढ़ाने के अलावा फल विधायन केंद्रों का कायाकल्प किया जा रहा है।