साहसिक खेल पैराग्लाइडिंग के लिए विश्व में दूसरे स्थान पर आने वाली बीड़ बिलिंग घाटी का आकाश रंग-बिरंगे मानवीय परिंदों की कलाबाजियों के लिए पूरी तरह से तैयार है। सात समंदर पार से आए विदेशी मेहमानों से घाटी में रौनक फिर से बढ़ गई है। रविवार से इंडियन ओपन पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिता से घाटी के एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर उभर कर सामने आने पर प्रदेश के पर्यटन को पंख लगेंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि हादसों के बावजूद पैराग्लाइडिंग का रोमांच कम नहीं हुआ है।
हालांकि साहसिक खेल के सीजन की शुरुआत में दो विदेशी पायलटों की मौत और दर्जन भर पायलट के दुर्घटनाग्रस्त होने से हुई है। यह घाटी के लिए कुछ हद तक दुखदायी रही है। लेकिन, खेल को इस प्रकार की घटनाओं के चलते ही साहसिक खेल का दर्जा प्राप्त है। इससे पूर्व भी तीन पायलट मौत का शिकार हुए हैं। अब तक यह आंकड़ा पांच तक पहुंच गया है।
भारतीय पायलट गुरप्रीत ढींडसा की मानें तो इस वर्ष टर्की में आयोजित खेल में 9 और स्लवानिया में सात पायलटों को जान से हाथ धोना पड़ा है। इस आंकड़े के हिसाब से बीड़ बिलिंग पायलटों के लिए सुरक्षित स्थान रहा है। उनका कहना है कि आकाश का रोमांच और प्राकृतिक नजारों से भरपू धौलाधार रेंज पायलटों को अपनी तरफ आकर्षित करती है। पायलट मौसम की परवाह न करते हुए आगे बढ़ते हैं। इसी कारण दुर्घटनाओं को न्योता देते हैं। इवेंट कोऑर्डिनेटर एवं एसडीएम विकास शुक्ला ने बताया कि पायलटों की सुरक्षा के लिए पुख्ता प्रबंध किए गए हैं ।
पायलटों की सुरक्षा के लिए किए हैं कड़े प्रबंध
प्रतियोगिता में 20 देशों के दस दर्जन पायलटों के प्रतिभागी के तौर पर भाग लेने की उम्मीद है। प्रतियोगिता के दौरान पायलटों की सुरक्षा के लिए हेलिकॉप्टर, एंबुलेंस, पर्वतारोहण विशेषज्ञ कर्नल नीरज राणा और राहुल सिंह की अगुवाई में बचाव दल पूरी तरह से तैयार रहेगी। प्रतियोगिता में दुर्घटनाओं का अंदेशा फ्री-प्लाइंग के मुकाबले कम रहता है। पायलट का जीपीएस और अन्य उपकरण हर समय उसकी दिशा की पूरी जानकारी देते रहते हैं।