सैन्य वैज्ञानिकों ने ऐसा उपकरण डिजाइन किया है जिससे भारत के ठंडे क्षेत्रों में गर्मी और गर्म क्षेत्रों में वातावरण सामान्य रखने में मदद मिलेगी। ये तकनीक सियाचिन और रेगिस्तान जैसे बार्डर एरिया में देश की रक्षा करने वाले जवानों के लिए लाभ दायक सिद्ध होगी।
डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) ने मनाली स्थित हिमअवधाव एवं अध्ययन संस्थान में जियो थर्मल नामक ये स्पेस हीटिंग सिस्टम तैयार किया है।
मनाली सासे में इस तकनीक का निर्माण किया गया है, जिसकी क्षमता 110 किलोवाट है। इसकी लागत दो करोड़ रुपये है। डीआरडीओ के डायरेक्टर जनरल अनिल दतार ने शनिवार को मनाली में इस हीटिंग सिस्टम का विधिवत उद्घाटन किया है।
उन्होंने कहा कि ये देश में विकसित पहली तकनीक है जिसमें थर्मल तकनीक को इस्तेमाल किया गया है। इससे 70 प्रतिशत ऊर्जा और ईंधन की बचत होगी।डीआरडीओ के प्रोजेक्ट इंचार्ज व वैज्ञानिक डा. जेसी कपिल ने बताया कि इस तकनीक में धरती के नीचे तापमान सामान्य रहने से ईंधन एवं ऊर्जा की बचत होगी तथा ठंडा तापमान गरम होगा व अधिक गर्मी होने पर तापमान सामान्य रहेगा।
कैसे काम करेगी तकनीक
जमीन के भीतर लगभग 50 मीटर नीचे से पानी निकाला जाएगा। इंटर मीडिएट हीट एक्सचेंजर के इस्तेमाल से इसे जरूरत के अनुसार ठंडा या गर्म करके हीटिंग या कुलिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।