र्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने देश की वर्तमान अर्थव्यवस्था पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि जीडीपी का 4 फीसदी के आसपास पहुंचना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। मंदी के दौर का परिचायक है।
उन्होंने चिंता जताई कि टैक्सटाइल और ऑटोमोबाइल क्षेत्र बर्बादी के कगार पर आ गए हैं। दोनों सेक्टरों से लाखों लोगों की छंटनी हो चुकी है। प्राइवेट सेक्टर में लाखों लोगों की रोजी-रोटी पर तलवार लटक रही है। मोदी सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन और गलत नीतियों के कारण निवेशकों में उदासीनता है।
किसानों को उनकी उपज के सही दाम नहीं मिल रहे हैं। कहा कि वह 56 साल से अधिक समय से राजनीति में हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में सरकार की गलत नीतियों के चलते देश में आर्थिक मंदी का ऐसा दौर कभी नहीं देखा।
पहले आनन-फानन में नोटबंदी और बाद में जीएसटी ने देश के उद्योग और व्यापार जगत को तबाही के कगार पर खड़ा कर दिया है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ सिर्फ 0.6 रह जाना चिंतनीय है। देश को आर्थिक मंदी से उबारने की बजाय मोदी सरकार और उनके मंत्री अपनी पीठ थपथपा रहे हैं।
वीरभद्र सिंह ने कहा कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में 3.5 लाख नौकरियां जा चुकी हैं। असंगठित क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर लोग नौकरियां खो रहे हैं। सरकार युवाओं को रोजगार देना तो दूर, प्राइवेट सेक्टर और असंगठित क्षेत्र से छटनी को नहीं रोक पा रही है।
सरकार ने बिना किसी ठोस योजना के आरबीआई से 1.76 लाख करोड़ लिए हैं। वित्त मंत्रालय के पास इन सवालों का कोई जवाब नहीं है कि सरकार इन पैसों का क्या करेगी।
मोदी सरकार देश में अर्थव्यवस्था की खस्ता हालत पर जनता को अंधेरेे में रख रही है। एक तरफ प्रधानमंत्री वर्ष 2024-25 तक देश की अर्थव्यवस्था को पांच हजार अरब डॉलर तक ले जाने के दावे कर रहे हैं, दूसरी तरफ देश की अर्थव्यवस्था पाताल में जा रही है।