मीडिया में जारी बयान में विधायक अनिल शर्मा ने कहा कि रविवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मंडी सदर के तवारफी और सराज के बाखली में जनसभाएं कर अहम शिलान्यास किए हैं। लेकिन सदर क्षेत्र के जिस कार्यक्रम में शामिल होने वह वहां पर गए थे, उस कार्यक्रम में विधायक होने के नाते उन्हें कोई निमंत्रण नहीं दिया गया।
चुनावी वर्ष में हिमाचल प्रदेश भाजपा के सदर विधायक एवं पूर्व ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने एक बार फिर अपनी ही सरकार के खिलाफ मोरचा खोल दिया है। उन्होंने जयराम सरकार पर मंडी सदर के विकास की अनदेखी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि सरकार चाहती तो सदर में भी सराज और धर्मपुर जैसा विकास हो सकता था। उन्होंने कहा कि इस अनदेखी का सबक जनता विधानसभा चुनाव में जरूर सिखाएगी। मीडिया में जारी बयान में विधायक अनिल शर्मा ने कहा कि रविवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मंडी सदर के तवारफी और सराज के बाखली में जनसभाएं कर अहम शिलान्यास किए हैं।
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लेकिन सदर क्षेत्र के जिस कार्यक्रम में शामिल होने वह वहां पर गए थे, उस कार्यक्रम में विधायक होने के नाते उन्हें कोई निमंत्रण नहीं दिया गया। तवारफी के समीप कुछ लोगों ने मुख्यमंत्री के समक्ष पंडोह क्षेत्र के विकास को लेकर कुछ मांगें रखीं, जिस पर मुख्यमंत्री ने लोगों को यह तंज कसा कि आपका विधायक तो यहां पर है नहीं और आप मांगें रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब किसी कार्यक्रम में बुलाया ही न जाए, तो फिर कोई वहां पर क्यों जाए।
उधर, जिला भाजपा के अध्यक्ष रणवीर ठाकुर ने कहा कि पुत्र और परिवार के मोह में विधायक खुद भ्रमित हैं। पिछले तीन सालों से वह अपनी जिम्मेदारियों से भाग रहे हैं और अब चुनावी वर्ष आते ही प्रकट हो गए हैं। भाजपा के चुनाव चिह्न पर जीते अनिल शर्मा को ऊर्जा मंत्री जैसा महत्वपूर्ण पद दिया गया था लेकिन उन्होंने परिवार को ऊपर रखकर जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है। उन्होंने कहा कि जयराम ठाकुर के नेतृत्व में सदर विधानसभा क्षेत्र लगातार विकास के पथ पर अग्रसर है।
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अनिल को गंवाना पड़ा था मंत्री पद
लोकसभा चुनाव में अनिल के बेटे एवं पंडित सुखराम के पोते आश्रय शर्मा ने मंडी संसदीय सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। उस दौरान अनिल शर्मा जयराम सरकार में ऊर्जा मंत्री थे। बेटे के चुनाव में उतरने के बाद अनिल शर्मा ने पार्टी प्रत्याशी के लिए कोई प्रचार नहीं किया था। इस चुनाव में आश्रय शर्मा को हार का मुंह देखना पड़ा था जबकि पिता अनिल शर्मा को मंत्री पद गंवाना पड़ा था। उस वक्त से ही अनिल शर्मा सरकार और भाजपा संगठन में अलग-थलग पड़े हुए हैं।