अवैध वन कटान के मामलों में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह बेशक वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी को क्लीन चिट दे चुके हों, लेकिन इन घटनाओं की मार भरमौरी को फिर भी झेलनी पड़ी है। पहले वन निगम के एमडी समेत कई अफसरों को सरकार ने बदला था।
इसके बाद मंत्री जी के निजी सचिव यानी पीएस को भी हटा दिया गया है। ये पीएस शुरू से ही भरमौरी के साथ थे। अक्सर ‘स्यापा’ तकिया कलाम प्रयोग करने वाले मंत्री के लिए ये घटनाएं किसी ‘स्यापे’ से कम नहीं रही हैं। बताते हैं कि ये दोनों अफसर मंत्री जी की मर्जी के थे।
मुख्यमंत्री ने अपनाया सख्त रवैया
वैध वन कटान का काम सरकार वन निगम से करवाता है, लेकिन इसके लिए हुए टेंडरों के नाम पर हरे पेड़ों की बलि लेने की घटनाएं सामने आने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय हरकत में आया।
वन काटुओं के खिलाफ हमेशा सख्त रहे मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने साफ संदेश दिया है कि बेशक वन मंत्री की भागीदारी ऐसी घटनाओं में प्रत्यक्ष न हों, लेकिन ऐसी घटनाएं रोकने की जिम्मेदारी भी उनकी है।
सूत्र ये भी कह रहे हैं कि मंत्री के पीएस को हटाने के लिए सचिवालय से लेकर वन अफसरों तक का फीडबैक था।
एलहमी, तारादेवी कटान से आए थे विपक्ष के निशाने पर
चंबा के एलहमी और शिमला के तारादेवी जंगल में अवैध कटान की घटनाओं पर विधानसभा के शीतकालीन सत्र में वन मंत्री विपक्ष के निशाने पर आए थे। उसके बाद ही तय हो गया था कि वन अफसर बदले जाएंगे। वन निगम में डा. ललित मोहन को एमडी लगा दिया गया, लेकिन यहां बात मंत्री के पीएस तक आ गई।
वन मंत्री के लिए अभी नए पीएस के ऑर्डर नहीं हुए हैं। पूछने पर उन्होंने कहा कि सरकार वन कटान की घटनाएं रोकने को सभी जरूरी कदम उठा रही है। विपक्ष उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश रच रहा है। पुलिस सारे मामले को देख रही है। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।