प्रदेश उच्च न्यायालयों के आदेशों के बावजूद विधायकों ने कोर माल रोड पर न्यू मैट्रोपोल के करीब अपनी गाड़ियां पार्क कर दीं। सोमवार की शाम विधायक दनदनाते हुए बत्ती लगी गाड़ियों को न्यू मैट्रोपोल तक ले आए और सड़क के किनारे गाड़ियों को पार्क करके अपने सरकारी आवास पर चले गए। जबकि, प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश के मुताबिक यहां कोई भी गाड़ी पार्क नहीं हो सकती। वहां रहने वाले विधायकों को शिमला क्लब से यहां तक गाड़ी लाने और ले जाने में छूट है।
न्यू मैट्रोपाल केवल ड्रापिंग प्वांइट है वहां से गाड़ी वापस लानी ही होगी लेकिन बुधवार को भी सुबह से लेकर दोपहर बाद तक कई गाड़ियां वहीं पार्क थी। प्रदेश उच्च न्यायालयों के आदेशों के उल्लंघन से सबसे ज्यादा परेशान अफसर दिखे। विधायकों ने कोर माल रोड पर गाड़ी पार्क करके अदालत के आदेशों की अवहेलना की है। लेकिन प्रशासन बेबस है। अगर पुलिस प्रशासन इन पर कोई कार्रवाई करता है तो उसे विधायकों प्रदेश सरकार का कोप झेलने के लिए तैयार रहना होगा।
प्रशासन के लिए आगे कुआं, पीछे खाई
प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेशों को लागू करवाने वाली सरकारी एजेंसी के दोनों तरफ आगे कुंआ पीछे खाई वाली स्थिति है। प्रशासन विधायकों को न यहां गाड़ी खड़ी करने के लिए कह रहा है और न ही उन्हें यहां से गाड़ी हटाने के लिए कह रहा है।
तो निकल सकता है स्थायी समाधान
यह बात सही है कि मैट्रोपोल में जहां इन्हें आवास दिए गए हैं वहां स्थायी पार्किंग का कोई इंतजाम नहीं है लेकिन उसके ठीक नीचे टूरिज्म और नगर निगम की बहुमंजिला पार्किंग हैं। प्रदेश सरकार चाहे तो इन विधायकों की दिक्कत का स्थायी समाधान करते हुए इन पार्किंग में गाड़ियों के लिए स्थायी जगह मुहैया करवा सकती है।
क्या कर सकती है प्रदेश सरकार
शिमला रोड यूजर एक्ट के सेक्शन 10 में प्रावधान है कि प्रदेश सरकार बंधित और प्रतिबंधित सड़क पर पार्किंग की सुविधा दे सकती है। न्यू मैट्रोपाल में भी स्थायी पार्किंग दे सकती है लेकिन मौजूदा समय में इसके लिए पहले प्रदेश हाईकोर्ट की मंजूरी जरूरी है। इस पूरे मामले में प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेशों को ही विधायकों ने नजर अंदाज कर दिया।
यह हैं प्रदेश उच्च न्यायालय का आदेश
शिमला शहर से बंधित और प्रतिबंधित
सड़क के मामले पर प्रदेश उच्च न्यायालय ने 21 नवंबर , 26 नवंबर और 27 नवंबर
2015 को आदेश दिए गए। इसी आदेश में साफ किया गया है कि शिमला क्लब से
मैट्रोपाल तक वहां रहने वाले विधायकों को गाड़ी ले जाने की छूट है लेकिन
वहां गाड़ी पार्क नहीं की जा सकती। केवल पिक एंड ड्राप की ही सुविधा विधायक
ले पाएंगे।
विधायकों से उलझना पड़ा महंगा, दो ट्रैफिक कांस्टेबल सस्पेंड
विधायकों
से उलझने के आरोप में दो ट्रैफिक कांस्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया है।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से बुधवार को लिखित में आदेश जारी कर दिए गए।
इनमें एक महिला कांस्टेबल पूजा और पुरुष कांस्टेबल देशराज शामिल है।
इन्हें पुलिस लाइन कैथू भेजा गया है। महिला कांस्टेबल सीटीओ चौक पर तैनात
थीं। यहां एक विधायक की गाड़ी की पार्किंग को लेकर विवाद हुआ।
विधायक
ने आरोप लगाया कि महिला कांस्टेबल ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। दूसरा
मामला शिल्ली चौक का है यहां एक अन्य विधायक ने आरोप लगाया कि उक्त
कांस्टेबल ने उनकी गाड़ी से स्टीकर हटाया और रोकने पर दुर्व्यवहार किया।
ट्रैफिक विंग के दो कर्मचारियों के सस्पेंड होने की सूचना से शहर की बंधित
और प्रतिबंधित सड़कों पर ड्यूटी दे रहे अन्य कर्मचारी सहम गए हैं।
उनका
दावा है कि जैसे आदेश उन्हें महकमा करता है उसी की वह अनुपालना कर रहे
हैं। उधर, इस बारे में एसपी शिमला डी डब्ल्यू नेगी ने कहा कि इन दोनों
कांस्टेबलों के खिलाफ ड्यूटी के दौरान दुर्व्यवहार की शिकायत आई। इस आधार
पर इन्हें सस्पेंड कर पुलिस लाइन भेज दिया गया है।
दुर्व्यवहार की शिकायत पर कार्रवाईः एसपी
इस
बारे में एसपी शिमला डी डब्ल्यू नेगी ने कहा कि इन दोनों कांस्टेबलों के
खिलाफ ड्यूटी के दौरान दुर्व्यवहार की शिकायत आई। इस आधार पर इन्हें
सस्पेंड कर पुलिस लाइन भेज दिया गया है। दोनों के खिलाफ शिकायत पर यह
कार्रवाई की है।