बाढ़ ही खेत खाने लग जाए तो रखवाली कौन करेगा? यह कहावत इन दिनों शासन में बैठे हुक्मरानों पर सटीक बैठ रही है। ऊंचे पदों पर बैठे कुछ चुनिंदा लोग धड़ल्ले से अवैध भवन निर्माण कर रहे हैं।
उन्हें रोकने के लिए जब मौके पर नगर निगम की टीम पहुंचती है तो उन पर राजनीतिक दबाव डालकर इसमें खलल न डालने की नसीहत दे दी जाती है। आम लोगों का कहना है कि शिमला में ही यह हाल है तो पूरे प्रदेश की तस्वीर क्या होगी?
शिमला शहर के प्रत्येक उपनगर में अवैध निर्माण चल रहा है। शहर से बाहर नगर निगम की परिधि वाले इलाके ब्यूलिया रोड के पास कुछ प्रभावशाली लोग अवैध भवन निर्माण में जुटे हैं। आलम यह है कि नक्शा तीन मंजिला पास है लेकिन मकान छह मंजिला खड़ा कर लिया है।
नई पॉलिसी के बाद धड़ाधड़ हो रहे हैं निर्माण
ऐसे दर्जनों उदाहरण देखने को मिल रहे हैं। शासन में बैठे लोग ही ऐसा करेंगे तो अन्य जगह स्थिति क्या होगी इसका अंदाजा भी सहज ही लगाया जा सकता है। नगर निगम भी केवल आम आदमी को काम रोकने के लिए नोटिस जारी करने तक सीमित है।
कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले शहर की जनता को यथा स्थिति भवन नियमित करने का आश्वासन दिया था। अब सरकार ने भवन नियमित करने के लिए पालिसी लाई है।
पॉलिसी में स्पष्ट है कि जिसने अपनी निजी भूमि पर 10 सितंबर 2014 से पहले अवैध भवन निर्माण किया है उसे ही नियमित किया जाएगा। इस पालिसी के आने के बाद ही धड़ाधड़ अवैध निर्माण शुरू हो गया। इनमें अधिकांश प्रभावशाली लोग हैं।
आज मौके पर भेजी जाएगी टीमः आयुक्त
निगम आयुक्त अमरजीत सिंह ने कहा कि उनके पास इस तरह की शिकायतें आई हैं। शनिवार को मौके पर टीम भेजी गई थी। अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाएंगे। सोमवार को भी टीम मौके पर भेजेंगे।
कानून सबके लिए बराबर है। यह पालिसी केवल 10 सितंबर से पहले बने अवैध निर्माण भवनों पर ही लागू होगी। कानून से खिलवाड़ करने वालों कतई बख्शा नहीं जाएगा। कानून सबके लिए एक बराबर है।
एमसी आयुक्त से तलब करेंगे रिपोर्ट
शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने कहा कि शहर में हो रहे अवैध भवन निर्माण करने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा। इस बारे में नगर निगम आयुक्त से सोमवार को रिपोर्ट तलब की जाएगी।