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Shimla News: टनल के निर्माण से दरके भवनों की जांच के आदेश, आईआईटी रुड़की को सौंपी जिम्मेवारी

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संजौली के शांति विहार में भवनों के दरकने के बाद से बंद है टनल का कार्य, विशेषज्ञों की टीम की रिपोर्ट पर शुरू होगा अब कार्य
सर्वेक्षण के लिए जिला प्रशासन ने जारी किया बजट
घरों की सुरक्षा, टनल निर्माण के पर राय देंगे विशेषज्ञ

अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला के शांति विहार क्षेत्र में निर्माणाधीन कैथलीघाट-ढली फोरलेन की ट्विन टनल (दो समानांतर सुरंगों) के निर्माण के कारण सैकड़ों घरों पर मंडरा रहे खतरे की जांच आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञ करेंगे।
जिला प्रशासन ने सर्वेक्षण के लिए आईआईटी रुड़की को पांच लाख रुपये जारी कर दिए हैं। जल्द ही विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंचकर पूरे क्षेत्र का दौरा करेगी और घरों में दरारें आने के कारणों की जांच करेगी। इसमें टीम क्षेत्र की जमीन और घरों को पहुंचे नुकसान का निरीक्षण करेगी। लोगों का आरोप है कि टनल के निर्माण से 14 से अधिक भवनों में दरारें आ चुकी हैं। इसके अलावा शांति विहार क्षेत्र में कई जगह जमीन में दरारें आने से डंगे भी दरक चुके हैं। जिला प्रशासन ने आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों से सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सर्वेक्षण करने के लिए कहा है। इसमें घरों में दरारें आने के कारणों का पता लगाने के साथ ही क्षेत्र की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए टनल निर्माण किस तरह किया जाए, इस पर राय मांगी है। प्रशासन ने विशेषज्ञों से यह भी बताने को कहा है कि निर्माण के दौरान किन एहतियाती उपायों को अपनाया जाए और किन मशीनों का इस्तेमाल करें। एहतियातन जिला प्रशासन ने खतरे को देखते हुए टनल निर्माण का कार्य अभी बंद करवा रखा है। इसके साथ ही एनएचएआई के ब्लास्टिंग लाइसेंस को भी निलंबित कर दिया है। प्रशासन ने फैसला लिया है कि अब टनल का निर्माण मशीनों के जरिये किया जाएगा। हालांकि, इस संबंध में भी विशेषज्ञों की रिपोर्ट का इंतजार किया जाएगा।
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400 से अधिक भवन खतरे की जद में
संजौली के शांति विहार इलाके के नीचे भट्ठाकुफर से चलौंठी तक करीब 2.7 किलोमीटर लंबी ट्विन टनल का निर्माण किया जा रहा है। एनएचएआई के मुताबिक, टनल के एलाइनमेंट के दायरे में आने वाले भवनों का सर्वेक्षण किया जा रहा है और उनकी मार्किंग भी की जा रही है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि टनल के ऊपर करीब 400 मकान बने हैं, जिन पर खतरा मंडरा रहा है। एनएचएआई की ट्विन टनल के एलाइनमेंट के दायरे में आने वाले भवनों के मालिक फोरलेन ट्विन टनल प्रभावित भवन मालिक संघर्ष समिति से जुड़ चुके हैं। इसे देखते हुए लोगों ने अपने घरों की सुरक्षा के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ने का फैसला लिया है। समिति के सदस्यों ने सवाल उठाया है कि पुराने सर्वे के तहत 12 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद वहां निर्माण क्यों नहीं किया गया। उनका दावा है कि पुराने सर्वे के दौरान कई घरों को उजाड़ा गया था जबकि सर्वे में बदलाव के बाद अब सैकड़ों घरों पर खतरा मंडरा रहा है।
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कोट
शांति विहार में लोगों के भवनों की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता है। आईआईटी रुड़की को सर्वेक्षण का जिम्मा सौंपा है। इसके लिए पांच लाख रुपये जारी कर दिए हैं। विशेषज्ञों से पूरे क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण करने के लिए कहा है। इसमें भवनों की सुरक्षा और भविष्य में किस तरह से काम किया जाएगा, इस संबंध में भी राय मांगी गई है।
-ज्ञान सागर नेगी, एडीएम (प्रोटोकॉल), शिमला
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