देश भर में अब टीबी के रोगियों की शीघ्र पहचान होगी। कुछ मिनट में एक किट के प्रयोग से रोगियों में टीबी का पता लग जाएगा। आईआईटी मंडी के वैज्ञानिक प्रेगनेंसी किट की भांति टीबी रोग टेस्ट के लिए किट बनाने में जुटे हैं। इसके लिए शोध चल रहा है। यदि वैज्ञानिकों की मेहनत रंग लाई तो जल्द टीबी रोगियों की त्वरित पहचान हो सकेगी।
साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड ने आईआईटी मंडी को यह जिम्मा सौंपा है। देश में टीबी रोगियों की पहचान समय पर न होना भी रोग के देशभर में पांव पसारने का मुख्य कारण है। आईआईटी के प्रोफेसर डॉ. सरिता आजाद और पीएचडी शोधार्थी पंकज नरूला ने कहा कि देश में टीबी रोगियों की शीघ्र पहचान में
दिक्कतों और रोग के फैलने के कारणों के अलावा टीबी रोगियों उम्र, लिंग के आधार पर शोध होगा। टीबी रोगियों की शीघ्र पहचान को डाइग्नोस तकनीक में सुधार पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए एक किट तैयार की जाएगी। यह किट प्रेगनेंसी किट की भांति त्वरित परिणाम देगी। कहा कि शोध के लिए प्रदेश स्वास्थ्य विभाग से मदद ली जा रही है।
देश के 30 जिलों में टीबी रोग का अधिक प्रकोप
देश में टीबी रोगियों के इलाज को राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रम चला है। रोगियों की शीघ्र पहचान न होने से रोग लगातार पांव पसार रहा है। वर्ष 1997 में भारत के संशोधित राष्ट्रीय टीबी रोग नियंत्रण कार्यक्रम (आरएनटीसीपी) के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ ने डायरेक्टली ऑर्ब्जर्ड ट्रीटमेंट शॉर्ट कोर्स (डाट्स) को भारत में लागू किया।
विकसित देशों के मुकाबले विकासशील देशों में बढ़ रहे टीबी रोग का प्रकोप चिंतनीय है। विश्व में छह देश ऐसे हैं, जिनमें दुनिया भर के 60 फीसदी टीबी रोग के मरीज हैं। इनमें भारत भी है। भारत में आरएनटीसीपी के तहत 730 जिलों में यह कार्यक्रम चला है। इनमें 64 जिले ऐसे हैं, जिनमें एक लाख की जनसंख्या पर 180 से अधिक मरीज हर बर्ष सामने आते हैं। टॉप 30 जिले ऐसे हैं, जिनमें टीबी रोग का प्रकोप ज्यादा हैं। इस सूची में हिमाचल के भी आठ जिले हैं।