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ईपीएफ, वेतन समय पर देते तो बच जाती चार जानें

Sat, 29 Aug 2015 12:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मंडी
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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कमांद (मंडी) में हुए गोलीकांड मामले की मजिस्ट्रेट जांच पूरी हो गई है। अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी मंडी ने जांच रिपोर्ट उपायुक्त को सौंपी दी है। मजिस्ट्रेट जांच में पाया गया कि अगर मजदूरों को समय पर ईपीएफ तथा वेतन का भुगतान किया गया होता तो हड़ताल की नौबत नहीं आती।
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साथ ही गोलीकांड जैसी घटना नहीं होती। करीब 30 पेज की जांच रिपोर्ट में कंस्ट्रक्शन कंपनी, ईपीएफओ तथा सीपीडब्ल्यूडी की लापरवाही पाई गई। आईआईटी कमांद के निर्माणाधीन नॉर्थ कैंपस में 20 जून को वेतन तथा ईपीएफ की मांग कर रहे मजदूरों पर पंजाब से आए बाउंसरों ने गोलियां चलाई थीं।

जवाबी कार्रवाई में चार बाउंसरों की मौत हो गई थी। गोलीकांड मामले की मजिस्ट्रेट जांच एडीएम विवेक चंदेल को सौंपी गई थी। जांच में 19 लोगों के बयान दर्ज किए गए। मजिस्ट्रेट जांच में पाया गया कि आईआईटी मंडी के निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को समय पर ईपीएफ व वेतन का भुगतान किया जाता तो गोलीकांड की घटना नहीं होती।
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मजदूरों को करीब 51 लाख रुपये का ईपीएफ भुगतान नहीं किया गया। मजिस्ट्रेट जांच में यह भी पाया गया कि कंस्ट्रक्शन कंपनी सुप्रीमो का कांट्रेक्ट रजिस्ट्रेशन भी फरवरी 2015 तक था, जिसे रिन्यू नहीं किया गया। जिला उपायुक्त संदीप कदम ने बताया कि आईआईटी कमांद घटना की मजिस्ट्रेट जांच पूरी हो चुकी है। जांच रिपोर्ट को प्रदेश सरकार को भेजा जाएगा।
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