भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी में सीवरेज वाटर और फार्मास्यूटिकल कंपनियों के वेस्ट वाटर से आईआईटी मंडी के विशेषज्ञ प्रोफेसर हाइड्रोजन और सीएनजी फ्यूल तैयार करेंगे। इसके लिए आईआईटी मंडी में अत्याधुनिक प्लांट तैयार किया जाएगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने आईआईटी मंडी के विशेषज्ञ को यह कार्य सौंपा है। आईआईटी मंडी के विशेषज्ञों ने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है।
मंत्रालय ने आईआईटी मंडी को इसके लिए तीन करोड़ स्वीकृत कर दिए हैं। मंत्रालय ने इस बाबत नोटिफिकेशन जारी कर दी है। यदि आईआईटी मंडी के विशेषज्ञों की मेहनत रंग लाती है तो देश के बड़े शहरों में पेश आ रही सीवरेज वाटर की शुद्धिकरण की समस्या हल हो जाएगी। साथ ही आने वाले समय में ईंधन की खपत भी पूरी हो सकेगी।
आईआईटी मंडी के विशेषज्ञ इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में नामी फार्मास्यूटिकल कंपनियों से संपर्क कर रहे हैं ताकि कंपनियों के वेस्ट वाटर का इस्तेमाल किया जा सके। आईआईटी मंडी के सात प्रोफेसर इस कार्य में जुटे हैं।
ऐसे तैयार होगा फ्यूल
प्रो. अतुल धर के नेतृत्व में संस्थान के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग विभाग और स्कूल ऑफ बेसिक साइंस के प्रोफेसर इस कार्य को करने में लगे हैं। प्रो. डॉ. श्याम, डॉ. सतुशीला पवार, डॉ. राहुल, डॉ. आदित्य हलधर, डॉ. तुलिका श्रीवास्तव और डॉ. रीकरानी कोनर शोध कार्य कर रहे हैं।
सीवरेज वाटर से फ्यूल तैयार करने के लिए विशेषज्ञ सबसे पहले सीवरेज बैक्टीरिया की पहचान करेंगे। इसके बाद केमिकल फार्मूला विकसित करने के बाद विशेषज्ञ हाइड्रोजन और मीथेन फ्यूल तैयार करेंगे। वहीं, कंपनियों के वेस्ट वाटर में इसी तकनीक का इस्तेमाल करके पानी को शुद्ध किया जाएगा। इससे बचे अवशेष से ही विशेषज्ञ फ्यूल तैयार करेंगे। इस बैक्टीरिया को लंबे समय तक जीवित रखा जाएगा। फिर इसको फ्यूल में ढाला जाएगा।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय से 30 सितंबर को प्रोजेक्ट मिलने की सूचना मिली है। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए तीन सालों का समय मिला है। सात सदस्यीय प्रोफेसरों का पैनल कार्य में जुट गया है। सीवरेज वाटर और फार्मास्यूटिकल वेस्ट वाटर का शुद्धिकरण करने के साथ इससे फ्यूल तैयार किया जाएगा। इस दिशा में प्रोफेसरों ने कार्य शुरू कर दिया है। -प्रो. डा अतुल धर प्रोजेक्ट समन्वयक