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मनरेगा ने मजबूत की महिलाएं, शराबबंदी को भी मिला बल

Thu, 13 Sep 2018 01:26 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडी
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सूबे में मनरेगा से महिलाओं का आर्थिक सशक्तीकरण हुआ और शराबबंदी को बढ़ावा मिला है। आईआईटी मंडी और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट एंड पंचायतीराज (एनआईआरडीपीआर) की ओर से किए गए शोध में यह खुलासा हुआ है।

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शोध कार्य में सूबे की पंचायत प्रतिनिधियों की कार्यशैली पर तैयार की गई इस प्रोजेक्ट रिपोर्ट को केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद देश भर में लागू किया जाएगा। 

आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ ह्मयूनिटी एंड सोशल साइंस की प्रो. डॉ. रमना थापर ने बताया कि शोध में सामने आया है कि मंडी जिले में हो रहे मनरेगा कार्यों को 75 फीसदी महिलाएं कर रही हैं।
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देश में यह औसतन 48 फीसदी है। जिन पंचायतों में अधिक महिलाएं मनरेगा कार्य कर आर्थिक रूप से संपन्न बनी हैं, उन्हीं पंचायतों में शराबबंदी भी लागू हुई है। जिले की लंबाथाच पंचायत से शराबबंदी शुरू थी। इसी पंचायत में यह महिलाओं की मनरेगा में भागीदारी 80 फीसदी के लगभग है।

शोध में यह भी खुलासा हुआ है कि मनरेगा कार्यों के होने से प्रदेश में लोगों का शहरों की ओर पलायन भी कम हुआ है और एससी-एसटी वर्ग का सशक्तीकरण हुआ है।  

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ओवरटाइम कर बनाया पुल, फिर पंचायत में करवा दी शराबबंदी

उपमंडल सुंदरनगर के निहरी गांव में महिलाओं ने आपसी मेलजोल, मनरेगा और आईपीएच विभाग के प्रयासों से पानी की किल्लत को दूर किया। यहां पर लंबे अरसे पानी की किल्लत चल रही थी। जिसे महिलाओं ने पहल कर हल किया।              

सराज विस क्षेत्र में मनरेगा से महिलाओं ने लंबाथाच चड्डी खदरी पुल बनाया। इसके लिए महिलाओं ने मनरेगा में ओवरटाइम लगाया। यह पुल हर वर्ष बरसात में बह जाता था। महिलाओं के प्रयास से यह पुल महज 100 दिन में बन तैयार हो गया। इसी पंचायत में प्रदेश मेें सबसे पहले शराबबंदी लागू हुई थी। 

एनआईआरडीपीआर सेंटर फॉर वेज इंप्लायमेंट के हेड एस. ज्योथिस ने कहा कि केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद यदि सूबे के प्रतिनिधियों की कार्यशैली को देश में लागू किया गया तो प्रभावी परिणाम सामने आएंगे।
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