बता दें, सरकारी अस्पतालों में मरीजों से पर्ची के 10 रुपये शुल्क वसूलने के मामले में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने गुरुवार को स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने कहा कि रोगी कल्याण समिति तय करेगी कि मरीजों से पर्ची के 10 रुपये लेने हैं या नहीं। इस संबंध में सरकार ने कोई संस्तुति नहीं की है। अस्पतालों को स्वायत्त किया गया है। अस्पताल अगर साफ-सफाई और रखरखाव के लिए ऐसा करना चाहते हैं, तो वे 10 रुपये पर्ची का शुल्क लगा सकते हैं। अस्पताल अगर नहीं चाहते हैं और उनके अपने संसाधन हैं तो उन्हें पर्ची शुल्क लेने की जरूरत नहीं है।
ये अस्पताल की रोगी कल्याण समिति तय करेगी, जिसमें स्थानीय लोग होते हैं। कैबिनेट सब कमेटी ने एक राय के तहत कहा कि सभी अस्पतालों को स्वायत्त होना चाहिए। अस्पतालों की सफाई व्यवस्था, उपकरणों के रखरखाव और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं के लिए इस तरह का शुल्क हो सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में सरकार के पास साफ-सफाई और रखरखाव से जुड़े कुछ सुझाव जरूर आए थे और कैबिनेट की सब कमेटी की भी सिफारिश सामने आई थीं, लेकिन सरकार ने इस पर कोई बाध्यकारी निर्णय नहीं लिया।