रोगी कल्याण समिति की बैठक में जहां स्वास्थ्य मंत्री पंद्रह मिनट देरी से पहुंचे वहीं शिक्षा मंत्री आधा घंटा लेट आए। बैठक को कॉलेज प्राचार्य डॉ. मुकंद लाल शुरू करने वाले थे लेकिन स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार ने उन्हें रोक लिया और कहा कि शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज को आने दें। शिक्षा मंत्री साढ़े ग्यारह बजे के बाद बैठक में पहुंचे।
सूत्रों का कहना है कि पहले तो शिक्षा मंत्री ने बैठक में आने से ही मना कर दिया था लेकिन स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार के आग्रह के बाद वह बैठक में आए। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि मंत्री अस्पताल प्रबंधन से नाराज चल रहे हैं। इसकी वजह से उन्होंने बैठक में आने को लेकर सहमति नहीं दी थी। बैठक में उन्होंने अस्पताल में चल रहे कार्यों को लेकर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल भी खड़े किए।
उन्होंने डॉक्टरों की पार्किंग में इमरजेंसी में आने वाले दो वाहनों को खडे़ करने की इजाजत देने की वकालत की। बैठक में निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. रविचंद शर्मा, आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जनक राज, केएनएच की एमएस डॉ. अंबिका चौहान, मुख्य चिकित्सा अधिकारी जिला शिमला डॉ. नीरज मित्तल, एसीएफ प्रणव नेगी, कर्मचारी महासंघ अध्यक्ष सुखदेव वर्मा, रीटा चौहान, सदस्य मदन शर्मा, कपिल महाशय और अन्य सदस्य मौजूद रहे।
सबसे देरी से पहुंचे विशेष सचिव स्वास्थ्य
शिमला। आईजीएमसी में हुई आरकेएस की बैठक में विशेष सचिव स्वास्थ्य डॉ. निपुण जिंदल सबसे देरी से पहुंचे। जिंदल, शिक्षा मंत्री के भी बाद बैठक में पहुंचे। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य (हेल्थ) को न देखकर पूछा कि वह क्यों नहीं आए। कहा कि अगर वह नहीं आ पाए तो नॉमिनी के बारे में कमेटी को अवगत करवा देते।
ओपीडी ब्लॉक का लिया फीडबैक
अस्पताल में बैठक से पहले स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार ने न्यू ओपीडी ब्लॉक को लेकर लोक निर्माण विभाग से जानकारी ली। अस्पताल प्रबंधन ने बताया गया कि भवन का निर्माण कार्य (सिविल वर्क) अस्सी फीसदी तक पूरा हो चुका है। लेकिन ब्लॉक में लिफ्ट न लगने और भवन पर आ रहे अतिरिक्त खर्चे को लेकर जानकारी दी।
शिक्षा मंत्री को मंगवाई नई कुर्सी
कमेटी रूम में स्वास्थ्य मंत्री पहुंच गए थे। इस बीच उन्होंने अपने लिए लग्जरी चेयर देखी। इसके बाद मंत्री ने शिक्षा मंत्री के लिए भी इसी तरह की कुर्सी लाने को कहा। प्रबंधन ने इस पर तुरंत नई कुर्सी का इंतजाम किया। हालांकि इस तरह के कार्य करने को लेकर प्रबंधन की खूब किरकिरी भी हुई।