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Shimla News: आईजीएमसी के नाइट शिफ्ट कर्मियों को नहीं मिल रही बस सुविधा

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टैक्सियों और निजी वाहनों से जाना पड़ रहा घर
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। आईजीएमसी में नाइट शिफ्ट में सेवाएं दे रहे नर्सिंग व अन्य पैरामेडिकल स्टाफ को देर रात घर लौटने के लिए बस सुविधा नहीं है। इससे उन्हें हर दिन निजी साधनों पर निर्भर होना पड़ रहा है, जो न केवल खर्चीला है, बल्कि महिलाओं के लिए असुरक्षित भी।

शहर में हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की नियमित बस सेवाएं रात लगभग 9:30 बजे तक ही संचालित होती हैं। ऐसे में दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले कर्मचारी, खासकर महिलाएं, घर लौटने के लिए महंगी टैक्सियों या अन्य निजी वाहनों का सहारा लेने को मजबूर हैं। इसका सीधा असर उनके मासिक वेतन पर भी पड़ रहा है।
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आईजीएमसी नर्सिंग यूनियन और अन्य कर्मचारी संघों ने कई बार प्रशासन से नाइट शिफ्ट कर्मचारियों के लिए सुरक्षित और सस्ती परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाने की मांग की है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। हाल ही में प्रशासन की ओर से दो बसें हायर करने का प्रस्ताव जरूर आया है, लेकिन ये बसें दिन के समय की ड्यूटी शिफ्ट के लिए ही हैं। ऐसे में नाइट शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों को किसी भी तरह की राहत नहीं मिल रही है।
कर्मचारियों का कहना है कि मरीजों की सेवा में दिन-रात तत्पर रहना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन ड्यूटी खत्म होने के बाद सुरक्षित घर लौटना भी उनका अधिकार है। आईजीएमसी जैसा संस्थान, जहां रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं और सैकड़ों कर्मचारी तीनों शिफ्टों में कार्यरत रहते हैं, वहां एक मजबूत और समर्पित परिवहन व्यवस्था की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।
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कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि एचआरटीसी के सहयोग से आईजीएमसी से विभिन्न क्षेत्रों के लिए रात 10 बजे के बाद विशेष बस सेवाएं चलाई जाएं। इसके साथ ही नाइट शिफ्ट कर्मचारियों को सब्सिडी या पास सुविधा भी दी जाए, ताकि वे सुरक्षित और किफायती तरीके से घर पहुंच सकें।
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