दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के नए भवन में आईजीएमसी के कुछ विभागों को शिफ्ट किया जाएगा। इसका खाका तैयार कर लिया है। इसके लिए आईजीएमसी के प्रिंसिपल और संबंधित विभागाध्यक्षों ने मुआयना भी कर लिया है। हालांकि यह पूरा भवन सिटी अस्पताल डीडीयू के लिए तैयार किया जा रहा है। लेकिन अब यहां आईजीएमसी को भी जगह दी जा रही है।
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इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि एक तो आईजीएमसी से भीड़ कम होगी और दूसरा डीडीयू आने वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी। लेकिन यहां तैनात होने वाले डॉक्टर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक के अधीन नहीं होंगे। वह केवल आईजीएमसी प्रशासन के प्रति जवाबदेह होंगे। नया भवन जुलाई माह 2016 के अंत तक पूरी तरह तैयार होने वाला है।
बताया जा रहा है कि डीडीयू अस्पताल में आई विभाग, ईएनटी विभाग, मेडिसन विभाग, रिनल डायलेसिस (किडनी) विभाग और सर्जरी विभाग को शिफ्ट करने की तैयारी है। नया भवन बनकर तैयार होते ही इन्हें शिफ्ट कर दिया जाएगा। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में जगह की कमी और ओपीडी के बाहर भारी भीड़ होने से इन विभागों को यहां स्थानांतरित करने का फैसला लिया है।
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ये विभाग हो सकते हैं शिफ्ट
डीडीयू अस्पताल के नए भवन का बाहरी स्ट्रक्चर बनकर पूरी तरह तैयार हो गया है। भवन के भीतरी हिस्सों का काम भी कुछ महीनों में पूरा होने वाला है। भवन में बनाए गए कमरे काफी बड़े हैं जिससे कि मरीजों तथा उनके तीमारदारों को बैठने और इधर-उधर आवाजाही करने के लिए परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी।
सर्कुलर रोड के साथ लगते अस्पताल प्रशासन ने दो फ्लोर गाड़ियों की पार्किंग के लिए दिए हैं जहां से सीधे ही मरीजों को इमरजेंसी वार्ड और अन्य वार्डों को लाया तथा ले जाया जा सके। अस्पताल में बनने वाली ओपीडी अभी तक बनी ओपीडी से काफी माडर्न होगी। मरीजों की सुविधा के लिए बाहर कुर्सियां लगाई जाएंगी ताकि बुजुर्ग मरीजों को परेशान न होना पड़े।
इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर एसएस कौशल ने बताया कि उन्होंने डीडीयू अस्पताल जाकर साइट का निरीक्षण किया है, जबकि कुछ विभागों को वहां भेजने का खाका तैयार किया गया है। आई विभाग ईएनटी विभाग, मेडिसन विभाग, रिनल डायलेसिस (किडनी) विभाग और सर्जरी विभाग को रिपन के नए भवन में शिफ्ट करने की तैयारी है।
अश्वनी खड्ड के पानी में हेपेटाइटिस वायरस नहीं
अश्वनी खड्ड के पानी में पीलिया का कारण माने जाने वाला हेपेटाइटिस ए और ई वायरस नहीं मिला है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के महाराष्ट्र (पूणे) स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से अश्वनी खड्ड के पानी (रा वाटर) के सैंपल जांच के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद की पूणे प्रयोगशाला को भेजे थे।
जांच रिपोर्ट में लिखा है कि अश्वनी खड्ड के पानी में हेपेटाइटिस ए और ई वायरस नहीं है। इसलिए इसे दूषित करार नहीं दिया जा सकता। राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान की रिपोर्ट के बाद अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि यदि अश्वनी खड्ड का पानी दूषित नहीं है तो उन क्षेत्रों में पीलिया क्यों फैल रहा है जहां अश्वनी खड्ड के पानी की सप्लाई होती है? शहर में पीलिया के मामले सामने आने के बाद नगर निगम ने अश्वनी खड्ड से शहर के लिए पानी की सप्लाई बंद करवा दी थी।
मेयर संजय चौहान ने कहा कि नगर निगम शहर के लोगों को अश्वनी खड्ड के पानी का वितरण नहीं करेगा। आईपीएच नगर निगम को गिरि और गुम्मा परियोजना से क्षमता के अनुसार पूरा पानी उपलब्ध करवाए। इसके अतिरिक्त कोटी और बरांडी परियोजना का पानी जल्द से जल्द शिमला पहुंचाया जाए।
6 महीने में शिमला पहुंचेगा कोटी बरांडी का पानी
विश्वास भारद्वाज। राजधानी शिमला को छह महीने के भीतर कोटी बरांडी परियोजना का पानी मिल जाएगा। शहर को पानी की सप्लाई करने वाली अश्वनी खड्ड परियोजना के बाद विकल्प के तौर पर कोटी बरांडी परियोजना तैयार की जा रही है। परियोजना पर तीन करोड़ रुपये खर्च होंगे। परियोजना से शहर को रोजाना तीन से चार एमएलडी पानी की सप्लाई होगी। कोटी बरांडी नाला से करीब ढाई किलोमीटर पाइप लाइन बिछाकर पानी अश्वनी खड्ड परियोजना के इन टेक टैंकों तक पहुंचाया जाएगा।
यहां से पानी अश्वनी खड्ड के पंपिंग स्टेशन और पाइप लाइन की मदद से शिमला शहर तक पहुंचेगा। आईपीएच ने परियोजना के लिए सर्वे का काम पूरा कर लिया है। एस्टिमेट अब सरकार को भेजने की तैयारी है। सोमवार को हाइड्रोलाजी विशेषज्ञों की टीम ने कोटी बरांडी परियोजना स्थल का निरीक्षण कर पानी मापने के लिए संयंत्र स्थापित किया।
हाइड्रोलॉजी विशेषज्ञों की रिपोर्ट से पता चलेगा कि कोटी बरांडी से शहर के लिए कितना पानी उठाया जा सकता है। अधिशासी अभियंता आईपीएच विनोद कुमार ने कहा कि कोटी बरांडी परियोजना का काम छह माह के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा है। परियोजना को लेकर सर्वे पूरा हो चुका है। सोमवार को हाइड्रोलॉजी की टीम ने भी कोटी बरांडी का दौरा किया है।
पीलिया के कारण जानने शिमला पहुंची केंद्र की टीम
राजधानी में अचानक बढ़े पीलिया के मामलों का कारण जानने केंद्र से एक टीम शिमला पहुंच गई है। यह टीम शहर के हर हिस्से में जाकर पीलिया फैलने के कारणों का पता लगाएगी। टीम ने सोमवार को रिपन अस्पताल से पीलिया के रोगियों का डाटा भी ले लिया। इसमें यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि कहां से पीलिया के सबसे अधिक मामले हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने हाल ही में पीलिया के कारणों का पता लगाने की बात कही थी। इसके बाद ही उनके निर्देश पर सोमवार को पीलिया की जांच के लिए केंद्र से एक टीम शिमला पहुंची। एनसीडी की टीम के तीन सदस्यों ने अस्पताल प्रबंधन से पीलिया के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी। शहर में किस इलाके से सबसे ज्यादा पीलिया के मामले आ रहे हैं।
पानी के सैंपल के बारे में भी जानकारी ली। अब तक कितने मामले पीलिया के पहुंचे और उन्हें किस तरह से उपचार दिया जा रहा है इसके बारे में भी डाटा एकत्रित किया। टीम अश्वनी खड्ड भी जाएगी। आईपीएच और नगर निगम से भी इस बारे में जानकारी लेगी। शहर में पीलिया के प्रकोप को देखते हुए पिछले दिनों मीडिया द्वारा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से पूछे सवाल पर कि वह इस मामले में क्या करेंगे तो उन्होंने कहा था कि वह शहर में फैले पीलिया रोग के कारणों पर केंद्रीय एजेंसी से जांच करवाएंगे।
डीडीयू की वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रंजना राव ने कहा कि इस दौरान कहां और किन-किन क्षेत्रों से ज्यादातर पीलिया के मामले सामने आए हैं, इसकी जानकारी टीम को दी गई। एनसीडी की टीम में तीन सदस्य हैं। टीम शहर में फैले पीलिया रोग के कारणों की जांच करेंगे एवं उन क्षेत्रों का भी दौरा करेंगे जहां से शहर को पानी की सप्लाई दी जाती रही है।
गाड़ियों की पासिंग के लिए अब शहर और आसपास के इलाकों से आने वाले लोगों को तारादेवी के चक्कर नहीं काटने होंगे। एचआरटीसी की ढली स्थित वर्कशाप को गाड़ियों की पासिंग के लिए अधिकृत कर दिया है। एचआरटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक अवतार सिंह ने बताया कि वर्कशाप के पासिंग स्टेशन को ऑनलाइन सुविधा से जोड़ दिया है। लोग अब अपनी गाड़ियों को पासिंग के लिए वर्कशाप ला सकते हैं। इससे पहले परिवहन विभाग की ओर से तारादेवी में गाड़ियों की पासिंग की जाती थी।
अधिक संख्या में पासिंग के लिए गाड़ियां पहुंचने के कारण लोगों का पूरा दिन तारादेवी में बरबाद हो जाता था। ढली में पासिंग सुविधा मिलने के बाद अब ऊपरी शिमला के लोगों और मशोबरा की ओर से आने वाले लोगों को बड़ी सुविधा मिलेगी। नहीं इस ताजा व्यवस्था से ऊपरी शिमला के वाहनों का दबाव भी शहर में कम होगा। इससे जाम भी नहीं लगेगा।
परिवहन विभाग सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत मंगलवार से शहर में जागरूकता कार्यक्रम शुरू करेगा। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी शिमला प्रशांत देष्टा ने बताया कि मंगलवार और बुधवार को तारादेवी सहित शहर भर में लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जाएगा।