भगवान न करे लेकिन राजधानी शिमला में किसी को कुत्ते ने काट लिया तो वैक्सीन नहीं मिलेगी। बात चाहे राज्य के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज की करें या जोनल अस्पताल रिपन की। कहीं भी वैक्सीन नहीं है। सिविल सप्लाई की दुकानों और बाजार में भी वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
इन अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजेक्शन ही उपलब्ध हैं। ये इंजेक्शन साधारण डाग बाइट में काम आते हैं। लेकिन अगर कुत्ते ने गहरा काटा हो तो इस इंजेक्शन के बाद लगने वाली वैक्सीन शिमला में कहीं उपलब्ध नहीं है। कुत्ते के काटने के 24 घंटे के भीतर इस वैक्सीन का लगना जरूरी है।
उल्लेखनीय है कि चलौंठी में शुक्रवार शाम करीब साढ़े छह बजे घर से टॉफी लेने दुकान गई छह साल की एक मासूम बच्ची वीना को पांच कुत्तों ने बुरी तरह से नोच दिया। बच्ची के सिर, गर्दन, टांग, बाजू और पेट में गंभीर चोटें आई हैं।
घायल हालत में परिजनों ने शुक्रवार रात को बच्ची को आईजीएमसी में दाखिल करवाया। डीप कट होने की वजह से वैक्सीन की जरूरत पड़ी लेकिन कहीं भी यह वैक्सीन नहीं मिली। अगले दिन सोलन से वैक्सीन मंगवाई गई। फिलहाल वीना की हालत में सुधार आ रहा है।
राज्य के सबसे बड़े अस्पताल
नहीं मिल रही है यह वैक्सीन
आईजीएमसी अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश ने कहा कि यह वैक्सीन शिमला में उपलब्ध नहीं है। महंगी होने और जल्दी खराब होने के कारण सप्लाई में नहीं रखी है। यही नहीं, ज्यादा एमआरपी की वजह से भी कुछ विवाद चल रहा है।
वैक्सीन क्यों नहीं, जांच करेंगे
स्वास्थ्य निदेशक डॉ. केएस डोगरा ने कहा कि हर अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध हैं। डीप कट में इस्तेमाल होने वाली वैक्सीन अगर अस्पतालों में नहीं है तो इसकी जांच की जाएगी। जिन अस्पतालों में यह वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, वहां जल्द सप्लाई दे दी जाएगी।