प्रतिवादी को 30 दिन के भीतर मुआवजे देने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी शिमला। अदालत ने सड़क दुर्घटना में व्यक्ति की मौत के बाद आश्रितों को 15 लाख रुपये बतौर मुआवजा देने का आदेश दिया है। न्यायाधीश अजय मेहता (मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण) की अदालत ने यह फैसला सुनाया।
मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने प्रतिवादी न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (बीमाकर्ता) को याचिका दायर करने की तारीख से प्रति वर्ष 7.5 प्रतिवर्ष ब्याज के साथ दावेदार को भुगतान करने के आदेश दिए हैं। निर्देश दिए हैं कि 30 दिन के भीतर दावेदार को मुआवजे की राशि का भुगतान करें। साल 2019 में शिमला ग्रामीण के बायचड़ी निवासी विनोद कुमार (31) की वाहन दुर्घटना में मौत हो गई थी। वह पेशे से सतलुज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) शिमला में क्लर्क के पद पर कार्यरत थे। एमएसीटी ने दायर याचिका में फैसला सुनाते हुए मृतक के परिवार वालों को 15 लाख रुपये देने के आदेश जारी किए हैं। मुआवजे की राशि जमा करने पर, इसे याचिकाकर्ता के बीच 50: 50 के अनुपात में विभाजित किया जाएगा।
यह मामला 29 मार्च 2019 को शिमला ग्रामीण क्षेत्र का है। रात लगभग 9.30 बजे शिमला-शिल्ली मार्ग पर बलवाग गांव के पास वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में विनोद के सिर और शरीर पर कई चोटें आईं। इसके कारण उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई और चिकित्सकों ने उसे आईजीएमसी शिमला में मृत घोषित कर दिया। बालूगंज थाना पुलिस ने मामला पंजीकृत किया था। इसके बाद मृतक की पत्नी सीमा ठाकुर और मां उषा ठाकुर ने एमएसीटी न्यायालय में उचित मुआवजे को लेकर याचिका दाखिल की। अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ताओं को 2019 से उस राशि से वंचित रखा गया था जिसके वह हकदार थे। निर्देश दिए है कि याचिकाकर्ताओं के शेयरों की मुआवजे की राशि किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में दो वर्षों के लिए एफडीआर के रूप में निवेश की जाएगी।