दिल्ली की एक एनजीओ की मदद से नामी होटलों और पोल्ट्री फार्मों में बतौर बंधुआ मजदूर काम कर रहे लगभग एक दर्जन मजदूरों को सोमवार को छुड़ाया गया। इसके बाद उन्हें एसडीएम ऊना पृथीपाल के समक्ष पेश किया गया। जहां से उन्हें घर भेजने के आदेश हुए।
एसडीएम के निर्देशों पर पीड़ित मजदूरों को होटलों और पोल्ट्री फार्म के मालिकों से लगभग चार लाख रुपये मुआवजा भी दिलवाया गया। अब इन मजदूरों को इनके गृह क्षेत्रों को भेजा जा रहा है। जबकि एक टीम गठित कर आरोपी दलाल रामविलास को दबोचने के लिए भेज दी गई है।
जानकारी के अनुसार मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरों के पक्ष में आवाज उठाने वाली दिल्ली की नेशनल कैंपेन कमेटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बांडेड लेबर ने 12 बंधुआ मजदूरों को छुड़वाने में सफलता हासिल की है।
एनजीओ की शिकायत पर जिला प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर ऊना जिला के दो नामी होटलों और एक पोल्ट्री फार्म से इन मजदूरों को छुड़वाया। एनजीओ के संचालक निर्मल गुराना ने बताया कि उनकी संस्था के पास शिकायत आई थी, जिस पर संस्था ने अभियान चलाकर रैकेट का पर्दाफाश किया है।
बताया जा रहा है सभी मजदूर दिल्ली के एक ठेकेदार द्वारा लगभग छह माह पहले जिला ऊना के विभिन्न स्थानों पर काम पर लगाए गए थे। लेकिन इन्हें आज दिन तक न ही वेतन मिला और न ही सुविधाएं दी गईं।
आरोपी दलाल इन होटल मालिकों से मजदूरों को मिलने वाला वेतन लेकर चलता बना। तब से ये बंधुआ मजदूर बनकर काम कर रहे थे। ये मजदूर त्रिपुरा व आसाम के रहने वाले हैं। गौर हो कि ऊना जिला में ईंट भट्टों पर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन होटलों और मुर्गीखाने में इस तरह के मामले पहली बार सामने आए हैं।
एसडीएम ने पीड़ितों को दिलाया चार लाख मुआवजा
एसडीएम ऊना पृथीपाल सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन ने इस मामले में कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि बंधुआ मजदूरी करवाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि पीड़ित मजदूरों को चार लाख रुपये के करीब मुआवजा दिलवाया गया है। इनको इनके गृह क्षेत्र में भेजने की कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। उन्होंने कहा कि बंधुआ मजदूरी को सहन नहीं किया जाएगा। मामला मानव तस्करी से तो नहीं जुड़ा है, इसकी भी जांच की जा रही है।