500-1000 रुपये की पुरानी करेंसी एक्सचेंज करने की लिमिट घटने से सूबे के तमाम बैंकों में अफरातफरी का माहौल बन गया। केंद्र सरकार ने शुक्रवार से 4500 की बजाय 2000 रुपये बदलने का फैसला लिया गया है। वीरवार सुबह वित्त सचिव की ओर से 18 नवंबर से सिर्फ 2,000 रुपये बदलने की घोषणा के बाद एकाएक बैंकों में पुराने नोट बदलवाने वालों की तादाद बढ़ गई।
बैंकों में नोट बदलवाने के लिए कतारों में लगे लोगों को जैसे ही इस घोषणा की जानकारी मिली, उन्होंने परिचितों को फोन कर नई व्यवस्था से अवगत करवाया और वीरवार को ही 4500 रुपये बदलवाने की बात कही। राजधानी शिमला में जहां कई लोगों ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए, वहीं कई लोगों ने फैसले को सराहा भी।
कई लोगों का मानना है कि पुराने नोटों को बदलवाने की बजाय जमा करवाना बेहतर है। 2000 रुपये एक्सचेंज हो जाएंगे। एटीएम से भी 2500 रुपये निकल जाएंगे। ऐसे में कुछ दिन तो आसानी से खर्च चल सकेगा। कुछ दिन बाद बैंकों में नकदी भी बढ़ जाएगी।
स्याही से बढ़ी समस्या
करेंसी बदलने के समय लगाई जा रही स्याही ने भी लोगों की समस्या बढ़ा दी है। लोग पुराने नोटों को बदलवाने के लिए परिचितों को तलाश रहे हैं। बैंकों के बाहर भी कई लोग एक-दूसरे से पूछ रहे हैं कि आप कितने नोट बदलवाने आए हैं। अगर 4500 से कम हैं तो हमारे नोट भी इसमें एडजस्ट कर लो।
कहीं कैश, तो कहीं स्याही खत्म
राजधानी शिमला के कई बैंकों में वीरवार को पुराने नोट नहीं बदले गए। कई बैंकों में जहां नकदी खत्म हो गई, वहीं कुछ बैंकों में नोट बदलने के समय लगाई जाने वाली स्याही ही नहीं मिली। इस कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। लोग एक बैंक से दूसरे बैंक में भटकते नजर आए।
काम छोड़ आना पड़ा नोट बदलवाने
लोअर बाजार शिमला के शेर सिंह ने कहा कि नोट बदलवाने के लिए बैंकों में भीड़ की वजह से वे बाद में नोट बदलवाने की सोच रहे थे। लेकिन वीरवार को जैसे ही पता चला कि 4500 रुपये बदलवाने का आज आखिरी दिन है, वह भी अपना काम छोड़ कर पुराने नोट बदलवाने बैंक पहुंचे।
दूसरी बार पहुंचे बैंक
लक्कड़ बाजार शिमला के सब्जी कारोबारी राम लाल ने बताया कि एक्सचेंज लिमिट घटने की सूचना मिलने के बाद वह वीरवार को दूसरी बार बैंक गए। अगर लिमिट नहीं घटती तो दो-चार दिन और भी इंतजार कर सकते थे। लेनदेन सुचारु रखने को नोट बदलवाना जरूरी था।
स्याही लगाना बेहतर
जाखू के राधे श्याम ने बताया कि वीरवार को उन्होंने पहली बार बैंक जाकर पुराने नोट बदलवाए हैं। अभी तक काम चल रहा था। नोट बदलवाने की रकम कम होने की खबर के चलते उन्हें बैंक आना पड़ा है। सोचा, जब स्याही लगवानी ही है तो 4500 रुपये बदलवाकर लगाना बेहतर रहेगी।
खर्च पूरा करने के लिए आना पड़ा बैंक
आईजीएमसी में अपने रिश्तेदार का ऑपरेशन करवाने आए मंडी के विकास चौहान ने बताया कि अस्पताल में पुराने नोट लिए जा रहे हैं। ऐसे में कोई समस्या पेश नहीं आई। अब शुक्रवार से 4500 की जगह 2000 रुपये ही बदलने की व्यवस्था के चलते उन्हें अन्य खर्चों के लिए पैसा बदलवाने आना पड़ा।