उन्होंने बताया कि प्राप्त कार्बन क्रेडिट को भविष्य में अंतरराष्ट्रीय या घरेलू कार्बन बाजार में ट्रेड किया जा सकता है। इससे एचआरटीसी को गैर-परिचालन आय का एक नया स्रोत मिलेगा, जो निगम की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सहायक होगा। डॉ. जिंदल ने कहा कि इस पहल के माध्यम से एचआरटीसी देश के उन अग्रणी राज्य परिवहन उपक्रमों में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो इलेक्ट्रिक बसों के माध्यम से कार्बन क्रेडिट उत्पन्न करने की प्रक्रिया पर काम कर रहे हैं। निगम लगातार अपने बेड़े में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने के प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से न केवल ईंधन लागत में कमी आएगी, बल्कि राज्य के कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।