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Shimla News: तय समय पर बस अड्डे से चलेंगी एचआरटीसी की बसें, कई रूट होंगे क्लब

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घाटे से उबरने की रणनीति पर क्षेत्रीय प्रबंधकों ने शुरू किया काम
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यात्रियों की संख्या बढ़ाने और डीजल का खर्चा कम करना रहेगा लक्ष्य
शिमला-चमोला खड्ड बस अब बड़ागांव तक चलेगी, सवारियां मिलने से आमदनी में होगी बढ़ोतरी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। घाटे से उबरने के लिए एचआरटीसी की बसें अब तय समय पर बस अड्डे से चलेंगी, जिससे ज्यादा यात्री मिल सकेंगे। इसके अलावा एक ही समय पर एक ही स्थान के लिए चलने वाली बसों को सवारियों की सुविधा को ध्यान रखते हुए क्लब करने की फैसला लिया गया है। इसको लेकर क्षेत्रीय प्रबंधकों ने अपने-अपने स्तर पर रूटों का आकलन करना शुरू कर दिया है। इसके अलावा ऐसे रूटों की पहचान भी की जा रही है, जहां पर रूट के अधिकांश हिस्से में सवारियां ही नहीं मिलती हैं। ऐसी बसों के रूट को कम किया जा रहा है। इससे डीजल की बचत होगी, वहीं चालकों और परिचालकों को दिए जाने वाले ओवरटाइम की भी बचत होगी। शिमला ग्रामीण डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधक ने इसको लेकर त्वरित कार्रवाई करनी शुरू कर दी है, जिससे एचआरटीसी को घाटे से उबारने में मदद मिल सकेगी। डिपो के तहत शिमला-चमोला खड्ड रूट पर चलने वाली बस के लिए पार्किंग की सुविधा नहीं होने के कारण 15 किलोमीटर पीछे लाना पड़ता था। इससे हर रोज डीजल की बर्बादी हो रही थी। इस रूट के आकलन के बाद अब इसे बड़ागांव तक बढ़ाने का फैसला लिया गया है। इससे लोगों को बस सुविधा का लाभ मिलेगा, वहीं एचआरटीसी की कमाई में भी इजाफा होगा। इसी तरह शिमला-नेरी रूट पर चलने वाली बस को सवारियां नहीं होने की वजह से रूट घटाकर ममलीग तक कर दिया गया है। इसी तरह से तारादेवी डिपो और शिमला लोकल डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधकों ने भी निगम के खर्च को कम करने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। इसके अलावा शिमला शहर और तारादेवी डिपो के तहत संचालित होने वाले रूटों की समीक्षा भी शुरू कर दी गई है, जिसमें लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ऐसे रूटों की पहचान की जा रही है, जहां पर एक ही समय में दो या इससे अधिक बसें चल रही हैं। शिमला शहर में भी कई बार देखा गया है कि एक ही समय में एक तरफ के लिए एक से अधिक बसों का संचालन किया जाता है। इन बसों में सवारियां भी अधिक नहीं होती हैं। इससे लोगों को भी इन बसों का उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है, वहीं खर्च भी बढ़ रहा है।

रूटों को क्लब करने और कम करने पर जनता की सुविधा का रखना होगा ध्यान
एचआरटीसी को बेशक अपने खर्चों को कम करने के लिए कई रूटों को क्लब करने के लिए साथ ही खाली हिस्सों को कम करना है, लेकिन चुनौती यह रहेगी कि कहीं इससे आम जनता को परेशानियों का सामना न करना पड़े। गौर रहे है कि शहरी क्षेत्रों में निजी बसें भी पर्याप्त संख्या में हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में सवारियों की कम संख्या के कारण लोग एचआरटीसी बसों पर ही निर्भर हैं। खासकर स्कूल के बच्चे, कर्मचारी सरकारी बसों पर ही निर्भर करते हैं। ऐसे में निगम को ऐसे क्षेत्रों का भी ध्यान रखना होगा जहां बेशक यात्री कम हैं, लेकिन वे एचआरटीसी की बसों पर ही निर्भर हैं।
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कोट्स
एचआरटीसी को अधिक से अधिक सवारियां मिलें, इसके लिए समय पर बसों को भेजने पर ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा जहां संभव हो सके रूटों को क्लब किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को भी दिक्कत न हो और निगम के खर्चे कम हो सकें। इसको लेकर हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। -अंकुर वर्मा, क्षेत्रीय प्रबंधक शिमला ग्रामीण डिपो
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