पथ परिवहन निगम के करीब 4000 पेंशनरों की पेंशन रुक गई है। एचआरटीसी की खस्ता माली हालत को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इन कर्मचारियों को निगम से सेवानिवृत्त हुए दो साल से अधिक समय हो गया है, लेकिन इन्हें जनवरी महीने की पेंशन रिलीज नहीं की गई।
एचआरटीसी टेक्निकल यूनियन ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के इस मामले को परिवहन निगम से उठाया है। एचआरटीसी की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है। इस वक्त निगम 700 करोड़ के करीब घाटे में चल रहा है। 31 मार्च, 2014 के बाद एचआरटीसी से करीब ढाई सौ कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए हैं, जिन्हें पेंशन तो दूर अन्य वित्तीय लाभों से वंचित रखा गया है।
न ग्रेच्युटी और न ही लीव इन कैशमेंट
छह महीने से इन कर्मचारियों को ग्रेच्युटी, लीव इन कैशमेंट सहित अन्य लाभ नहीं दिए गए हैं। ये सेवानिवृत्त कर्मचारी लगातार परिवहन निगम मुख्य कार्यालय में पहुंच रहे हैं लेकिन इन्हें आश्वासन ही दिया जा रहा है। इन कर्मचारियों की फाइलें टेबल से आगे नहीं खिसक रही है।
क्या है नियम- कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने से 6 महीने पहले पेंशन की फाइल बननी शुरू हो जाती है। जब कर्मचारी सेवानिवृत्त होता है तो उसे पेंशन के कागजात उसी वक्त दिए जाते हैं। सेवानिवृत्त होने के अगले महीने से कर्मचारियों को पेंशन मिलनी शुरू हो जाती है।
परिवहन मंत्री से उठाया मामला
एचआरटीसी टेक्निकल यूनियन के अध्यक्ष राजेंद्र ठाकुर ने बताया कि चार हजार के करीब सेवानिवृत्त को जनवरी महीने की पेंशन नहीं मिली है। मामला मंत्री से उठाया जाएगा।
इधर, एचआरटीसी के वित्तीय एडवाइजर कम चीफ अकाउंट्स आफिसर एमएल चौहान ने बताया कि 22 फरवरी तक पेंशनरों की पेंशन रिलीज की जाएगी। 2014 मार्च के बाद जो कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए हैं, उन्हें वित्तीय लाभ देने की कसरत चल रही है।