शहर के संकरे मार्गों पर राइड विद प्राइड टैक्सी सेवा के जरिये मुहैया करवाई जाती है परिवहन सुविधा
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नौ में से सिर्फ तीन इलेक्ट्रिक वैन दौड़ रही रूटों पर
इनोवा और टेंपो ट्रैवलर का भी हो रहा है इस्तेमाल
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला में बुजुर्गों, बच्चों और आम लोगों के लिए हिमाचल पथ परिवहन निगम की राइड विद प्राइड टैक्सी सेवा के रूट तो बढ़े हैं, लेकिन वाहनों की संख्या नहीं बढ़ी। शहर के संकरे मार्गों पर इस सेवा के जरिये ही परिवहन सुविधा मुहैया करवाई जाती है।
सुबह 7:00 से रात 9:00 बजे की अंतिम सर्विस तक लगातार चलने वाली निगम की टैक्सियों की हालत खराब होती जा रही है। रोजाना 1.70 लाख रुपये तक की कमाई करने वाली इस टैक्सी सेवा को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए नई गाड़ियों की खरीद जरूरी हो गई है। 40 से 45 रूटों पर रोजाना 300 तक चक्कर लगाने वाली गाड़ियों को मरम्मत के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल रहा है। इससे रूटों पर चल रही टैक्सियों में तकनीकी खराबियां आने लगी हैं और सवारियों के साथ स्टाफ की परेशानी भी बढ़ रही है। निगम की नौ इलेक्ट्रिक वैन में से सिर्फ तीन ही रूटों पर चल रही हैं, जबकि छह खराब पड़ी हैं।
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राइड विद प्राइड के 40 से 45 रूटों पर रोजाना आठ से नौ चक्कर लगाने के लिए निगम के पास स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत मिली 18 इनोवा, 18 टेंपो ट्रैवलर और तीन इलेक्ट्रिक वैन उपलब्ध हैं। इनमें से रोजाना दो से तीन गाड़ियां खराब होती रहती हैं। उपनगरों से सीटीओ तक लोगों की मांग और सरकार के आदेशों के बाद नए टैक्सी रूट शुरू किए गए, लेकिन उस अनुपात में नई गाड़ियों की खरीद नहीं हुई। टैक्सी सेवा में चल रही अधिकतर गाड़ियां 12 साल पूरे कर चुकी हैं। ऐसे में उन्हें मरम्मत और नियमित रखरखाव की जरूरत है। रूटों और सर्विस चक्करों की तुलना में गाड़ियों की संख्या कम होने के कारण लगातार चल रही इन गाड़ियों को रिपेयर के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है।
एचआरटीसी की इन टैक्सियों में रोजाना हजारों लोग सफर करते हैं और इससे निगम को अच्छी कमाई भी हो रही है। ऐसे में परिवहन निगम के लिए समय रहते राइड विद प्राइड टैक्सी सेवा में इस्तेमाल हो रहे वाहनों के रखरखाव के लिए अलग बजट का प्रावधान करने और नई गाड़ियों की खरीद करना जरूरी हो गया है। इसके अलावा पर्याप्त संख्या में चालकों की व्यवस्था करने की भी जरूरत है। 39 गाड़ियों को चलाने के लिए निगम के पास लगभग इतनी ही संख्या में चालक हैं। किसी चालक के छुट्टी पर जाने पर व्यवस्था प्रभावित होने लगी है। एचआरटीसी टैक्सी सर्विस के इंचार्ज सेजू राम ने माना कि रूट बढ़ने के बाद गाड़ियां कम पड़ने लगी हैं।
निगम से की है नई गाड़ियों की मांग
एचआरटीसी राइड विद प्राइड टैक्सी सर्विस में साल-दर-साल नए रूट शामिल कर गाड़ियां चलाई जा रही हैं और लोगों को सेवाएं देने का प्रयास किया जा रहा है। रूटों के अनुपात में गाड़ियां कम हैं। नई गाड़ियों की मांग निगम प्रबंधन के समक्ष रखी है। रूटों पर चलने वाली गाड़ियों की मरम्मत और रखरखाव समय-समय पर नियमित रूप से किया जा रहा है, ताकि लोगों को परेशानी न हो।
-अंकुर वर्मा, क्षेत्रीय प्रबंधक, शिमला लोकल डिपो