इस पर चालक से जवाबतलब किया गया। मामले की सूचना कर्मचारी यूनियन के प्रधान के पास पहुंची। इसके बाद यूनियन के प्रधान ने मंडलीय प्रबंधक को फोन कर अभद्र भाषा का प्रयोग किया और धमकाया। मामले की ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।
इसके बाद 12 जून मंगलवार देर शाम हमीरपुर पुलिस ने डीएम की शिकायत पर आरोपी कंडक्टर के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। अभी पुलिस ने केस ही दर्ज किया है और शिकायत करने वाले डीएम का हमीरपुर से धर्मशाला तबादला कर दिया गया।
हालांकि, निगम प्रबंधन का कहना है कि ट्रांसफर एक रूटीन प्रक्रिया है। निगम में तीन डीएम और 5 आरएम समेत चौदह अधिकारियों के तबादले हुए हैं। उधर, कांग्रेस अध्यक्ष नरेश ठाकुर का कहना है कि प्रदेश सरकार में अधिकारियों-कर्मचारियों का जमकर शोषण हो रहा है। ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारियों को धमकाया जा रहा है।
ऊना में लाइसेंस धारकों से 61 लाख रुपये किराये की रिकवरी न किए जाने के मामले में निगम प्रबंधन ने जांच के आदेश दे दिए हैं। परिवहन मजदूर संघ के नेता शंकर सिंह ठाकुर ने निगम प्रबंधन से इस मामले की शिकायत की है। शिकायत में शंकर सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि डीएम की ओर से पैसे वसूलने के मामले में जो रिपोर्ट तैयार की गई है, वह गड़बड़ है।
जिस लाइसेंस धारक से लाखों रुपये किराये की रिकवरी की जानी थी, उसे मृत घोषित कर दिया। जबकि वह जीवित है। सीजीएम एचके गुप्ता को इस मामले को गंभीरता से देखने को कहा है। वीरवार को शंकर सिंह ने इस मामले को लेकर एमडी संदीप भटनागर से मुलाकात कर उच्च स्तरीय जांच करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले साल 23 मई को कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी का इंचार्ज डीएम को बनाया गया।
9 लाइसेंस धारकों से करीब 80 लाख रुपये से अधिक की वसूली की जानी थी। कमेटी की ओर से दी गई रिपोर्ट में कहा गया कि दुकान नंबर 17-18 और एक कैंटीन के लाइसेंसी से किराये के तौर पर 61 लाख रुपये वसूल किया जाना था। जबकि दूसरे लाइसेंस धारक से पार्किंग फीस के रूप में 6 लाख 87 हजार वसूल किए जाने थे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन दोनों में से एक की मौत हो चुकी है। ऐसे में इनकी आउट स्टेंडिंग राशि को राइट आफ किया जाए। शंकर सिंह का आरोप है कि जिसे मृत घोषित किया गया, वह जिंदा है। निगम के प्रबंध निदेशक संदीप भटनागर ने कहा कि शंकर सिंह आए थे। उन्होंने इस मामले को लेकर दस्तावेज दिए हैं।