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ठियोग हादसा: खट-खट की आवाज आई और ड्राइवर ने खो दिया नियंत्रण

Sun, 22 May 2016 09:44 AM IST
अजय ठाकुर /अमर उजाला, ठियोग (रामपुर बुशहर)
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हादसे में बस के परखच्चे उड़ गए। - फोटो : अमर उजाला
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एचआरटीसी की खटारा बस में आई तकनीकी खराबी कई लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ गई। हादसे से ठीक पहले बस से खट-खट की आवाज आ रही थी। यदि चालक इस पर ध्यान देता तो शायद इतने लोगों की जान नहीं जाती। खट-खट की आवाज आने के बाद चालक बस पर नियंत्रण नहीं रख पाया और इसके बाद वही हुआ, जो नहीं होना चाहिए था।
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सड़क पर क्रैश बैरियर होते तो भी हादसे से बचा जा सकता था। हादसे से कुछ देर पहले ही तीखे मोड़ पर बस से खट-खट की आवाज आई, लेकिन चालक इस पर नियंत्रण नहीं रख सका। सड़क से करीब 100 फुट नीचे गिरी बस ने तीन पलटे खाए। बस की छत भी अलग हो गई थी। इस कारण कुछ लोग बस से बाहर जा गिरे थे।

इससे 11 लोगों की मौत हो गई। घटनास्थल पर चीखोपुकार का माहौल था। उधर, हादसे की सूचना मिलते ही लोग घटनास्थल की ओर दौड़े। पुलिस टीम भी 20 मिनट में मौके पर पहुंच गई। शनिवार सुबह करीब 11.30 बजे हुए इस हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है।
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बाली ने कही थी क्रैश बैरियर लगाने की बात
दो वर्ष पूर्व भी इस क्षेत्र में निगम की बस दुर्घटनाग्रस्त हुई थी। इससे ठीक तीन किमी आगे यह बस गिरी। उस वक्त तत्कालीन परिवहन मंत्री जीएस बाली ने सड़क को चौड़ा करने और क्रैश बैरियर लगाने की बात कही थी, लेकिन दो साल बाद भी प्रशासन और सरकार के ढुलमुल रवैये के कारण काम पूरा नहीं हो सका।

जन्मदिन को ही आई मौत
बजरोली पुल में हादसे का शिकार हुई अध्यापिका प्रोमिला अपने घर से सैंज के लिए दूध लेकर गई थीं। वापस आने के लिए परिवहन निगम की बस में बैठीं। घर से एक मोड़ पहले ही हादसा हो गया। जैसे की प्रोमिला के पति पूर्ण शर्मा और उनका बेटा मौके पर पहुंचे तो प्रोमिला के शव को देख कर दोनों के होश उड़ गए।

पूर्ण शर्मा मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के प्रधान निजी सचिव सुभाष आहलुवालिया के वरिष्ठ निजी सचिव हैं। प्रोमिला शर्मा (47) उनकी पत्नी थीं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस पर गहरा शोक व्यक्त किया है। वह जुब्बल के शड़ाणा गांव की निवासी थीं। आज ही प्रोमिला का जन्मदिन था। वह सैंज स्कूल में लेक्चरर थीं।

खीरे के बीजों ने बचाई धूड़ी की जान  
एक महिला की जान खीरे के बीजों ने बचा ली। धूड़ी देवी लेलूपुल से निगम की इस बस में बैठ गई थीं, लेकिन जैसे ही बस चली उन्हें सामान से भरे लिफाफे की याद आई। इसे वह दुकान पर भूल गई थीं। वह लिफाफा लेने गईं, वापस आईं तो बस निकल चुकी थी। उन्होंने बताया कि खीरे के बीजों ने उन्हें बस में बैठने से बचा लिया।
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