हिमाचल परिवहन निगम के बेड़े में पहली बार अत्याधुनिक तकनीक से लैस लो फ्लोर बसें शामिल होने जा रही हैं। हिमाचल के लिए केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने 800 बसें खरीदने के लिए 289 करोड़ का प्रोजेक्ट मंजूर किया है। 90 करोड़ की पहली किस्त मिल गई है। इस प्रोजेक्ट के तहत खरीदी जा रही सभी बसों में कई ऐसी सुविधाएं होंगी, जो ड्राइवर और सवारियों के लिए पहली बार शामिल की जा रही हैं।
इन बसों की खासियत है कि यदि बस का दरवाजा खुला रह गया तो बस स्टार्ट ही नहीं होगी। चलती बस का दरवाजा खुलेगा ही नहीं। कुछ बसों में आटो गियर होगा। ये तकनीक राज्य में चल रही सरकारी बसों में वर्तमान में नहीं है। बस लो फ्लोर होगी।
यानी इसमें चढ़ने के लिए बुजुर्गों और बच्चों को ज्यादा मुश्किल नहीं होगी। बस में लगा इंटेलिजेंस सिस्टम इसकी स्पीड और माइलेज को मॉनीटर करेगा। यदि ड्राइवर ओवर स्पीड हुआ तो इसकी शिकायत एसएमएस के जरिये कंट्रोल रूम में जाएगी।
नई बसों की पांच खूबियां
भारत सरकार ने जेएनएनयूआरएम के तहत खरीदी जाने वाली बसों के लिए अर्बन बस स्पेशिसिकेशन-टू गाइडलाइंस जारी की है। इन्हें फालो करना जरूरी है। हिमाचल सरकार ने इन बसों को चलाने का जिम्मा बस अड्डा प्रबंधन प्राधिकरण को दिया है। प्राधिकरण ने हिमाचल की पहाड़ी भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुए कुछ बदलाव भी इसमें करवाए हैं। ये अब सभी पहाड़ी राज्यों के काम आएंगे। अधिकांश बसें 32 सीटर होंगी।
1. ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन। प्रदेश में पहली बार कुछ बसों में आटो गियर सुविधा।
2. आटोमेटिक स्लाइडिंग डोर। इसका कंट्रोल सवारी के बजाए ड्राइवर के पास होगा।
3. बसों में दोनों ओर दो-दो सीटें होंगी। अंदर का स्पेस खुला-खुला होगा।
4. आईटीईएस प्रणाली होगी। आने वाले स्टेशन की सूचना माइक के जरिये मिलेगी।
5. बस लो फ्लोर होगी और आकार एयरो डायनामिक होगा। इससे माइलेज भी बढ़ेगी।
हादसे की सूरत में नहीं होंगे दो टुकडे़
हिमाचल में हो रहे बस हादसों में करीब 32 फीसदी मामलों में गिरने के बाद बस के दो टुकड़े हुए हैं। बस के दो टुकड़े होने पर मरने वालों की संख्या भी ज्यादा हो जाती है। इसलिए नई बसें इंटरनेशनल बस बॉडी कोड को फॉलो करेंगी। यानी हादसे के बाद भी इनके दो टुकड़े नहीं होंगे।
सारा स्ट्रक्चर यूबीएस-टू के अनुसार होगा। परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कहा कि नई बसें यूबीएस-टू गाइडलाइंस के मुताबिक बन रही हैं। प्रक्रिया चल रही है। 4-6 महीने में बसें सड़कों पर होंगी। अब एचआरटीसी नई खरीद भी इसी तकनीक के अनुसार करेगा।