सरकारी तंत्र ने जो फुर्ती मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के दौरे पर दिखाई, वैसी ही फुर्ती आम जनता के लिए दिखाई होती तो सैंज घाटी का सबसे बड़ा ऐतिहासिक गांव कोटला राख होने से बच जाता। बीते रविवार को सड़क न होने के कारण गांव तक दमकल वाहन नहीं पहुंच पाए थे जिससे 80 घर और पांच मंदिर जलकर राख हो गए। जबकि जिला प्रशासन को गांव में सीएम के दौरे की सूचना मिली तो लोक निर्माण विभाग ने तीन जेसीबी और 50 मजदूर लगाकर रातों-रात सड़क बना दी।
बुधवार को मुख्यमंत्री का काफिला इसी सड़क से कोटला गांव पहुंचा। मुख्यमंत्री ने पीड़ितों के पुनर्वास के लिए डेढ़ करोड़ रुपये का एलान किया। सीएम ने लोगों से अपील की कि नए घर बनाते वक्त ध्यान दें कि घर जोड़कर न बनाए जाएं। सीवरेज की उचित व्यवस्था करें। घास को घरों से दूर रखें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हर गांव को सड़क से जोड़ा जा रहा है। लोग जमीन दें सरकार सड़क बनाएगी।