हिमाचल विवि और कॉस्मो फेराइट्स लिमिटेड के बीच हुआ एमओयू, चुंबकीय तकनीक रहेगी प्राथमिकता
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100 करोड़ के अनुदान के लिए केंद्र को भेजेंगे प्रस्ताव
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला और कॉस्मो फेराइट्स लिमिटेड ने शनिवार को विश्वविद्यालय परिसर में उन्नत चुंबकीय तकनीक और ऊर्जा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में संयुक्त शोध के समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
समझौते के तहत अगले एक वर्ष के भीतर फेराइट मैटीरियल (चुंबकीय पदार्थ) आधारित मोटर विकसित करने की दिशा में काम शुरू किया जाएगा। दोनों संस्थान केंद्र सरकार की वैज्ञानिक एवं औद्योगिक योजनाओं के तहत करीब 100 करोड़ रुपये के अनुसंधान अनुदान के लिए संयुक्त प्रस्ताव तैयार करेंगे और इसे केंद्र को भेजा जाएगा। समझौते के अनुसार विश्वविद्यालय का भौतिकी विभाग और कंपनी की अनुसंधान एवं विकास टीम मिलकर ऐसे चुंबकीय पदार्थ विकसित करने पर काम करेगी जो इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाले रेयर अर्थ मैग्नेट का विकल्प बनेंगे। कुलपति महावीर सिंह ने कहा कि रेयर अर्थ मैटीरियल महंगे होने के साथ सीमित देशों में उपलब्ध हैं जिससे वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन और तकनीकी निर्भरता बढ़ती है। इसके मुकाबले फेराइट आधारित तकनीक को अपेक्षाकृत कम लागत और पर्यावरण अनुकूल विकल्प माना जा रहा है।
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एमओयू के तहत संयुक्त शोध परियोजनाएं, छात्र इंटर्नशिप, तकनीकी प्रशिक्षण और फैकल्टी एक्सचेंज कार्यक्रम भी संचालित होंगे। कुलपति प्रो. महावीर सिंह की मौजूदगी में हुए कार्यक्रम में प्रो. एनएस नेगी, डॉ. रमेश ठाकुर, डॉ. संजय शर्मा और शोधार्थी उपस्थित रहे। कॉस्मो फेराइट्स की ओर से महाप्रबंधक संजीव कटोच, विकास ठाकुर, डॉ. पलाश कुमार, डॉ. करुणा सागर चतुर्वेदी और अनुसंधान टीम के वैज्ञानिक शामिल हुए।
यह होता है फेराइट मैटीरियल
फेराइट एक प्रकार का चुंबकीय पदार्थ है जो मुख्य रूप से आयरन ऑक्साइड और अन्य धातुओं के मिश्रण से तैयार किया जाता है। इसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, मोटर, ट्रांसफार्मर, स्पीकर और संचार तकनीकों में किया जाता है। फेराइट मैटीरियल की सबसे बड़ी विशेषता यह मानी जाती है कि यह अपेक्षाकृत कम लागत में तैयार हो सकता है। यह रेयर अर्थ रेयर मैग्नेट जिसमें लिथियम और मैंगनीज का उपयोग होता है का विकल्प है। वर्तमान में इलेक्ट्रिक वाहनों में अधिकतर रेयर अर्थ मैग्नेट का उपयोग होता है लेकिन उनकी कीमत अधिक है तथा उपलब्धता सीमित है। इसलिए वैज्ञानिक वैकल्पिक तकनीक पर काम कर रहे हैं।
विवि के लिए अहम है 100 करोड़ का प्रस्ताव
एचपीयू और कॉस्मो फेराइट्स केंद्र सरकार की विभिन्न अनुसंधान योजनाओं के तहत संयुक्त रूप से लगभग 100 करोड़ रुपये के अनुदान का प्रस्ताव तैयार करेंगे। इस राशि का उपयोग उन्नत रिसर्च लैब स्थापित करने, परीक्षण सुविधाएं विकसित करने, वैज्ञानिक उपकरण खरीदने और नई तकनीकों के प्रोटोटाइप तैयार करने में किया जा सकता है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो हिमाचल में पहली बार विश्वविद्यालय और उद्योग के संयुक्त सहयोग से बड़े स्तर पर चुंबकीय पदार्थ और ऊर्जा तकनीक पर शोध को बढ़ावा मिलेगा।