हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में बीते 29 नवंबर को हुए दीक्षांत समारोह में भाजपा के प्रदेश महामंत्री (संगठन) पवन राणा को सम्मानित करने के मामले में कुलपति ने इसे विश्वविद्यालय का परमाधिकार बताते हुए राज्यपाल को जवाब दे दिया है। कारण बताओ नोटिस का जवाब देते हुए कुलपति ने लिखा - विश्वविद्यालय स्वायत्त संस्थान है और राज्यपाल सांविधानिक प्रमुख इसलिए मिनट टू मिनट कार्यक्रम विश्वविद्यालय और कुलपति ही तय करते हैं। इसमें सम्मानित होने वाले अतिथियों का नाम भी प्रशासन ही तय करता है।
राज्यपाल को लिखे गोलमोल जवाब में वीसी ने स्क्रॉल या मिनट टू मिनट कार्यक्रम के उल्लंघन से तो इंकार किया है लेकिन भाजपा नेता के नाम का जिक्र न होने के बावजूद उन्हें सम्मानित किए जाने पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है। यही नहीं, जवाब में यह भी कहा कि पूर्व के दीक्षांत समारोहों व अन्य आयोजनों में भी विश्वविद्यालय द्वारा विशेष आमंत्रित अतिथियों को सम्मानित करने की बात कही है लेकिन उन नेताओं का जिक्र नहीं किया, जिन्हें किसी दीक्षांत समारोह में सम्मानित किया गया है। अंत में उन्होंने बुलाए गए अतिथियों को सम्मानित किया जाना विश्वविद्यालय का परमाधिकार बताया है। वीसी के इस गोलमोल जवाब का अब राजभवन अध्ययन कर रहा है। माना जा रहा है कि अध्ययन के बाद राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय कुलपति के इस जवाब के बाद आगे फैसला लेंगे।