हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के विभागों में शैक्षणिक सत्र 2024-25 के लिए राष्ट्रीय स्तर की छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए पीएचडी कार्यक्रम में प्रवेश लेने को 16 जूलाई तक बढ़ाई गई समय सीमा तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इंजीनियरिंग विषयों में पीएचडी की सीटें इस बार इसमें शामिल नहीं की गई हैं। विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग संस्थान यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (यूआईटी) में भी पीएचडी कार्यक्रम में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू की जानी है।
इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन पीएचडी प्रवेश के लिए रेगुलेशन तैयार कर रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन पिछली बार पीएचडी में एक प्रवेश को लेकर खड़े हुए विवाद के बाद अब किसी तरह की चूक नहीं करना चाहता है। विश्वविद्यालय प्रशासन रेगुलेशन और इसके अनुरूप आवश्यक पात्रता शर्ते, फीस सहित हर तरह के नियमों को तैयार करने के बाद ही यूआईटी में पीएचडी शुरू करेगा। रेगुलेशन तैयार होने और इसको विवि प्रशासन से मंजूरी मिलने के बाद ही पीएचडी की सीटों को विज्ञापित कर प्रवेश की प्रक्रिया को शुरू किया जाएगा। इंजीनियरिंग विषयों में पीएचडी में प्रवेश की प्रक्रिया अन्य विषयों से अलग होती है, इसमें नेट की जगह राष्ट्रीय स्तर की फेलोशिप प्राप्त करने के लिए गेट पास किया जाना जरूरी होता है।
यूजीसी की ओर से बनाए गए नियमों को ध्यान में रखकर ही विश्वविद्यालय प्रशासन यूआईटी में पीएचडी में प्रवेश के लिए रेगुलेशन तैयार करेगा, इसे विवि इंजीनियरिंग फैकल्टी सहित, एकेडमिक काउंसिल सहित अन्य संस्थाओं से मंजूरी दिलवाए जाने की प्रक्रिया को पूरा किया जाना है। यूआईटी में संचालित किए जा रहे आईटी, सिविल, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन में करीब तीस सीटों पर पीएचडी शुरू करने की तैयारी की जा रही है। अधिष्ठाता अध्ययन प्रो. बीके शिवराम ने कहा कि इंजीनियरिंग के इन विषयों में पीएचडी प्रवेश के लिए नियम और फीस स्ट्रक्चर रेगुलेशन बनाए जा रहे है, इसके तैयार होने पर इसे मंजूरी दिलवाई जाएगी।
विवि में पिछली बार प्रवेश के लिए हुआ था विवाद
पूर्व कुलपति प्रो. एसपी बंसल के कार्यकाल में यूआईटी में इंजीनियरिंग के विषयों में पीएचडी कार्यक्रम शुरू करने को आवेदन आमंत्रित किए गए। छह आवेदन ही आए थे, इनमें आवश्यक पात्रता शर्तों को पूरी करने वाले एक या दो ही थे। एक विभाग में प्रवेश दिया गया था, मगर इस पर भी विवाद खड़ा हो गया था, जिसके चलते एडमिशन नहीं हो पाई।