हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से संबद्ध 73 निजी बीएड कॉलेजों ने 2015 से लेकर विवि को सालाना दिए जाने वाली संबद्धता और निरीक्षण फीस का भुगतान नहीं किया है। ऐसे में विवि के कुलसचिव ने नोटिस जारी कर दस दिन में फीस जमा करवाने के आदेश जारी किए हैं। फीस जमा न करने पर इन कॉलेजों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
दरअसल केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की नेशनल काउंसिल फॉर टीचर्स एजूकेशन (एनसीटीई) ने प्रदेश के निजी बीएड कॉलेजों से विश्वविद्यालय की ओर से जारी संबद्धता प्रमाणपत्र जमा करवाने को कहा है। यह विवि तभी जारी करेगा, जब निजी कॉलेज आठ सालों से बकाया संबद्धता और निरीक्षण फीस चुकाएंगे।
चूंकि सत्र 2023-24 की बीएड की काउंसलिंग और सीट आवंटन प्रक्रिया को एचपीयू ही पूरा कर रहा है, जिसका शेड्यूल जल्द जारी होने वाला है। ये निजी बीएड कॉलेज 2015 से लेकर विवि को नियमों के तहत हर वर्ष अदा की जाने वाली औसतन 1.20 लाख प्रति कोर्स के हिसाब से फीस न चुकाने पर अड़े हुए हैं। इससे विवि को अब तक इस फीस के रूप में ही करोड़ों का नुकसान हुआ है।
फीस जमा करवाने पर ही दे पाएंगे संबद्धता प्रमाणपत्र : प्रो. वर्मा विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो. राजिंद्र वर्मा ने कहा कि विवि को 2015 से लेकर बकाया इंस्पेक्शन और एफिलिएशन फीस जमा करवाने को नोटिस जारी कर समय दिया गया है। निजी बीएड कॉलेज संघ पदाधिकारियों से बात कर उन्हें फीस जमा करवाने को कहा गया है।
फीस आने पर ही विवि संस्थानों का निरीक्षण करवाकर संबद्धता प्रमाणपत्र जारी कर पाएगा, जिसे एनसीटीई में जमा करवाना होता है। इसे जमा न करवाने पर निजी कॉलेजों के बैच को चलाने की एनसीटीई अनुमति रोक सकता है। इससे सीधे तौर पर नए बैच में पढ़ने वाले विद्यार्थी परेशान हो सकते हैं।
यह था मामला
2015 में एचपीयू ने निजी बीएड कॉलेजों की प्रति कोर्स संबद्धता और इंसपेक्शन फीस बढ़ाई थी, जिसका निजी बीएड कॉलेजों ने विरोध किया था। उनका तर्क था कि फीस एकमुश्त ली जानी चाहिए, हर साल नहीं। मामला उलझने पर निजी बीएड कॉलेजों ने तय फीस भी नहीं दी। फीस न देने पर कॉलेजों का निरीक्षण भी नहीं हो पाया।