फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

SCA चुनावः फ्लॉप होगा एचपीयू का फॉर्मूला!

विज्ञापन
विज्ञापन
हिमाचल विवि के छात्र संघ चुनाव के नए फार्मूले के तहत एससीए गठन में केवल मेधावी छात्र ही हिस्सा ले पाएंगे। ‘अमर उजाला’ ने प्रदेश भर के मेधावी छात्रों से बात कर इस बारे में उनकी मंशा जानना चाही।
विज्ञापन


इस सर्वे में ये बात सामने आई कि अधिकांश मेधावी छात्र ये जिम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं। उनका पहला मकसद मेरिट में अव्वल बने रहना है। हालांकि, विवि के फैसले से नाखुश हैं। उनका कहना है कि टॉपर्स पर एससीए प्रतिनिधित्व का भार थोपना नहीं चाहिए।

कुछेक छात्र राजनीति का स्वाद भी चखना चाहते हैं। लेकिन जब पढ़ाई और राजनीति में से किसी एक को चुनने की बात आती है तो वे पढ़ाई को तवज्जो देते हैं। पेश है एक रिपोर्ट।
विज्ञापन
Trending Videos

प्रत्यक्ष होना चाहिए एससीए चुनाव

शिल्पा कटोच कहती हैं कि वह कॉलेज से लेकर लोस तक प्रत्यक्ष चुनाव की पक्षधर हैं। मनोनयन प्रक्रिया में सिर्फ येस मैन ही मिलेंगे। वे एससीए का हिस्सा बनेंगी, इस पर समय आने पर ही फैसला लेंगी। यदि खुद को सक्षम समझेंगी और पढ़ाई से समय निकाल पाएंगी तो ही वे इस पद को स्वीकार करेंगी।
-शिल्पा कटोच एचपीयू विधि विभाग टॉपर, प्रथम, द्वितीय तृतीय सत्र

राजनीति से जोड़ना ठीक नहीं
कक्षा का प्रतिनिधित्व तो ठीक है, मगर यदि इसे राजनीति के साथ जोड़ा जाता है तो इससे दूर ही रहूंगी। यदि मौका मिलता है तो पढ़ाई व चुनाव दोनों में अपनी अहम भूमिका निभाऊंगी।
-युक्ति ठाकुर, टॉपर बीकॉम द्वितीय, वल्लभ कॉलेज मंडी

नेतृत्व नहीं, पढ़ाई को प्राथमिकता

छात्रों का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला तो इसका लाभ उठाऊंगा, इतना जरूर है कि पढ़ाई की कीमत पर नेतृत्व को प्राथमिकता नहीं दूंगा। मेरा पहला उद्देश्य पढ़ाई ही रहेगा, इससे जो समय बचेगा उसे ही राजनीति को दूंगा। नई प्रक्रिया का लाभ तभी है, यदि प्रशासन भी मनोनीत एससीए की मांग को तुरंत माने।
-राहुल वर्मा, बीए एलएलबी द्वितीय वर्ष टॉपर, एचपीयू

खेल, पढ़ाई के बाद वक्त कहां?
खिलाड़ी को एससीए में प्रतिनिधित्व देने का फैसला सही है, मगर सुबह-शाम खेल मैदान में अभ्यास, उसके बाद कक्षाएं लगाना और छात्रों की समस्याओं के लिए वक्त निकालना मुश्किल होगा। क्योंकि, उनकी खिलाड़ी के रूप में विवि के लिए जवाबदेही है। मांगे पूरी न होने की स्थिति में छात्रों को जवाब देना मुश्किल होगा।
-दीक्षा, इंटर यूनिवर्सिटी वॉलीबाल खिलाड़ी
विज्ञापन

मनोनयन से किनारा ही बेहतर

कक्षा का प्रतिनिधित्व करने पर छात्र हित का ध्यान रखना आवश्यक है। ऐसे में पढ़ाई को दिया जाने वाला समय इधर भी देना होगा। ऐसे में पढ़ाई प्रभावित होगी। अप्रत्यक्ष चुनाव से किनारा करना ही मेरे लिए बेहतर होगा।
-गवेश माधवी, टॉपर बीएससी द्वितीय वर्ष (नॉन मेडिकल) वल्लभ कॉलेज मंडी

शोध से वक्त निकालना मुश्किल
मनोनीत एससीए में शोध छात्रों को प्रतिनिधित्व देना सही है, मगर शोध छात्र होने के नाते उनके पास अन्य कामों से समय निकालना मुश्किल होगा। जो पढ़ाकू छात्र राजनीति में आना चाहते हैं उनके पास अच्छा मौका है। विवि प्रशासन सब जानता है कि क्या समस्याएं हैं। सिर्फ मनोनयन को औपचारिकता और यस मैन छात्र प्रतिनिधि की उम्मीद को लेकर लागू न करे।
-सुजान सिंह, शोधकर्ता, अर्थशास्त्र, एचपीयू
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें