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धर्मशाला स्टेडियम: फारूख से जयराम रमेश के संबंधों पर उठा सवाल

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एचपीसीए प्रवक्ता संजय शर्मा ने एचपीसीए पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने वाले पूर्व केंद्रीय जयराम रमेश पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 में जयराम रमेश ने बतौर वन एवं पर्यावरण मंत्री रहते खुद क्रिकेट स्टेडियम में आकर इसकी जमकर तारीफ की थी। इसे दुनिया का सबसे खूबसूरत स्टेडियम बताया था। आज उसी स्टेडियम की जमीन में उन्हें भ्रष्टाचार कैसे दिख गया। तब उन्हें भ्रष्टाचार क्यों नहीं दिखा। रमेश 2011 में जब क्रिकेट स्टेडियम धर्मशाला में आए थे तो फारूख नाम का व्यक्ति दिल्ली से उनके साथ क्यों आया था।
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शर्मा के मुताबिक जयराम रमेश सीएसआईआर पालमपुर के एक कार्यक्रम में आने से पहले स्टेडियम में आए थे। इन दोनों को एक दूसरे से क्या लाभ होना था, पूर्व केंद्रीय मंत्री इसका जवाब दें। शर्मा ने जयराम रमेश के साथ उस वक्त आए फारूख नाम के व्यक्ति की पूर्व केंद्रीय मंत्री के साथ फोटो भी मीडिया में जारी की।
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'विषय संबंधी पूरी जानकारी हासिल कर लें जयराम'

उन्होंने कहा कि दो दिन पहले दिल्ली में एचपीसीए पर आरोप लगाने से पहले जयराम रमेश को विषय संबंधी पूरी जानकारी हासिल कर लेनी चाहिए थी। एचपीसीए को लीज पर जमीन सरकारी नियमों की पूरी प्रक्रिया निभाने के बाद ही मिली है। जनरल हाउस में प्रस्ताव पारित होने के बाद ही एचपीसीए ने सरकार से लीज पर जमीन मांगी थी।

उस वक्त युवा सेवाएं एवं खेल विभाग ने प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा था।  युवा सेवाएं एवं खेल विभाग के निदेशक मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के करीबी सुभाष आहलुवालिया थे। उन्होंने पूछा कि नेहरू और गांधी के नाम पर चले ट्रस्टों को कितनी जमीन सरकार ने किस भाव से दी है। इन ट्रस्टों से आज तक जनता को कितना फायदा हुआ। ट्रस्टों के अध्यक्ष पहले कौन कौन थे अब कौन हैं। उन्होंने कहा कि एचपीसीए निजी कंपनी नहीं है। धारा 25 के तहत यह गैर लाभकारी कंपनी है।
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